Iran-US War: एपिक फियर अलर्ट! ईरान ने खोला मोर्चा, अमेरिका-इजरायल पर बड़ा वार, मिडिल ईस्ट में लंबी चल सकती है लड़ाई


ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ाघरी ने अमेरिकी नेतृत्व और उसकी सैन्य रणनीति पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि दुश्मन की हवाई सुरक्षा क्षमताओं में आई गंभीर गिरावट के बाद वह खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है. ईरानी स्टेट टीवी पर जारी बयान में ज़ोल्फ़ाघरी ने दावा किया कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने इजराइल के एयर-डिफेंस सिस्टम और रडार को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता पर गहरा असर पड़ा है.

ज़ोल्फ़ाघरी के अनुसार, क्षेत्र में अब किसी भी तरह का इच्छा-आधारित आदेश नहीं चलेगा, बल्कि हालात का निर्धारण ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व और उसकी जनता की इच्छा के अनुरूप होगा. उन्होंने इसे इस्लामी गणराज्य की सशस्त्र सेनाओं की निर्णायक रणनीतिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह कदम ईरानी राष्ट्र के अखंड और वैध अधिकार की रक्षा के लिए उठाया गया है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मैसेज

ज़ोल्फ़ाघरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मैसेज देते हुए कहा कि युद्ध के परिणाम सोशल मीडिया पोस्ट या ट्वीट्स से तय नहीं होते. उनके मुताबिक, असली नतीजे युद्ध के मैदान में तय होते हैं और वह जगह ऐसी है, जहां अमेरिकी बल जाने का साहस नहीं दिखाते. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि इस संघर्ष को “एपिक फियर” यानी “महान भय” कहा जाना चाहिए, न कि एपिक फ्यूरी. ईरान की इस तीखी बयानबाजी के पीछे मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है. क्षेत्र में पहले से बढ़ी सैन्य तैनाती और ड्रोन-मिसाइल घटनाओं के कारण हालात पहले ही संवेदनशील बने हुए हैं. ऐसे में इस तरह के सार्वजनिक बयान तनाव को और बढ़ा सकते हैं तथा कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित कर सकते हैं.

ईरान के लोगों का क्या कहना है?

इसी बीच, ईरान के भीतर कई नागरिकों का कहना है कि वे किसी भी संभावित युद्धविराम समझौते के साथ अंतरराष्ट्रीय अलगाव समाप्त होने की उम्मीद कर रहे हैं. दूसरी ओर, मंगलवार (17 मार्च) को इजरायली मीडिया ने दावा किया कि उसकी सेना ने ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी को निशाना बनाया है. हालांकि, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह हमले में मारे गए या घायल हुए. इस दावे पर ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे क्षेत्रीय हालात को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है. 



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