दुबई में अमेरिका का कोई मिलिट्री बेस नहीं तो फिर ईरान ने वहां क्यों दागीं मिसाइलें? सामने आई ये वजह


ईरान पर हमला होने के बाद तेहरान ने रविवार (1 मार्च 2026) को भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई, बहरीन की राजधानी मनामा और कतर की राजधानी दोहा में ताबतोड़ हमले किए. यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईरान ने उनके देश पर करीब 165 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी है. इनमें से 152 को यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया बाकि बचे 13 मिसाइलें समुद्र में जा गिरी. कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिका के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, लेकिन दुबई में ईरान की ओर से किए गए हमले ने दुनिया को चौंका दिया क्योंकि वहां यूएस का आधिकारिक सैन्य अड्डा नहीं है.

ईरान ने दुबई को क्यों बनाया निशाना?

यूएई की राजधानी अबू धाबी में अल धफरा यूएस एयर बेस है. अमेरिकी वायु सेना यूएई वायु सेना के साथ मिलकर इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल करती है. अमेरिकी एयरफोर्स सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यहां से इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान चलाए गए हैं. दुबई स्थित जेबेल अली बंदरगाह अमेरिकी नौसेना का मुख्य पोर्ट है.

हालांकि यह अमेरिका का आधिकारिक सैन्य अड्डा नहीं है. इसके बावजूद यह पोर्ट मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना को बड़ी ताकत प्रदान करता है. अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और अन्य नौसैनिक जहाज यहां अक्सर आते जाते हैं. युद्ध के समय रणनीतिक रूप से यह अमेरिका के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

मिडिल ईस्ट में कहां-कहां है यूएस का सैन्य ठिकाना?

सऊदी अरब, कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और इराक से अमेरिका अपना सैन्य ठिकाना ऑपरेट करता है. बहरीन में यूएस नेवी के फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर है. दोहा में अल उदैद एयर बेस अमेरिकी सेंट्रल कमांड का एडवांस हेडक्वार्टर है. अमेरिका यहां से मिस्र से लेकर कजाकिस्तान तक अभियानों का संचालन करता है. यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है, जहां करीब 10 हजार यूएस सैनिक तैनात हैं. 

सऊदी में 2300 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात

इराक के अनबार प्रांत में यूएस का अली अल सलेम एयर बेस है. यह इराकी सुरक्षा बलों को समर्थन देता है. कुवैत में कैंप अरीफजान अमेरिकी आर्मी सेंट्रल का अग्रिम मुख्यालय है. सऊदी अरब में अमेरिका के 2300 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं. वह सऊदी सरकार के साथ मिलकर एयर एंड मिसाइल डिफेंस मुहैया करवाते हैं. रियाद के पास स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस ये सैनिक तैनात हैं. यही कारण है कि ईरान ने उन जगहों को निशाना बनाया जहां से अमेरिका की सेना किसी भी तरह से ऑपरेशन को अंजाम देती है.



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