राजपूतों का नेता बनना चाहते हैं आनंद मोहन? बिहार में क्षत्रिय का दबदबा कितना? समझिए यहां


पूर्व सांसद और कभी बाहुबली नेता रहे आनंद मोहन के बयान से बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है. उनकी पत्नी लवली आनंद जेडीयू से सांसद हैं, बेटे चेतन आनंद भी जेडीयू से विधायक हैं, लेकिन आनंद मोहन के पार्टी विरोधी सुर से सियासी हलचल पैदा हो गई है. सवाल है कि आनंद मोहन के बयानों के क्या मायने हैं? क्या वे राजपूतों का नेता बनना चाहते हैं? खबर को समझिए.

सबसे पहले समझिए कि आनंद मोहन ने क्या कहा

आनंद मोहन ने कहा है कि नीतीश कुमार को जिंदा दफना दिया गया है. कार्यक्रम में उनकी तस्वीर नहीं रहती है. उन्होंने जेडीयू को थैली की पार्टी करार दिया. यह भी कहा कि करोड़ों में मंत्री पद बिका है. बनाना था तो निशांत को मुख्यमंत्री बनाते. आज निशांत ट्रोल हो रहे हैं कि सचमुच ये स्वास्थ्य मंत्री के लायक नहीं हैं. 

‘राजपूत का नेता बनने की कोई बात नहीं’

आनंद मोहन राजपूत जाति से आते हैं. उनके बयानों से सवाल उठने लगा है कि क्या आनंद मोहन राजपूतों का नेता बनना चाहते हैं या बेटे को कैबिनेट में जगह दिलाने की ललक है? राजपूत जाति से आने वाले जेडीयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी संजय सिंह ने इस पर एबीपी न्यूज़ से कहा कि राजपूत का नेता बनने की कोई बात नहीं है. नेता समाज बनाता है और राजपूत सामाज आनंद मोहन को अच्छी तरह से जानता है. वह पुत्र मोह में बयानबाजी कर रहे हैं. 

संजय सिंह का कहना है कि उनके बेटे को मंत्री नहीं बनाया गया है क्योंकि धमदाहा से लगातार चुनाव जीतने वाली और इस बार (2025 के चुनाव में) भी 50 हजार वोट लेशी सिंह चुनाव जीती हैं. राजपूत से जेडीयू ने उन्हें मंत्री बनाया है. उनकै बेटै चेतन आनंद जो नबीनगर से लड़े जसे चित्तौड़गढ़ कहा जाता है वहां से मात्र 112 वोट से वो जीते. फिर भी वह अपने आप को सिंह इज किंग और टाइगर अभी जिंदा की बात कर रहे हैं. वह नीतीश कुमार का अपमान कर रहे हैं. 

संजय सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर मिलर हाई स्कूल के मैदान में हमने बड़ी रैली कराई थी. उसके बाद नीतीश कुमार ने उनकी रिहाई के लिए कदम उठाया था. उनकी रिहाई हुई. वह सब भूल चुके हैं और अपने पुत्र मोह में पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं.

क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?

इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ संतोष कुमार ने कहा कि आनंद मोहन राजपूत जाति के नेता हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. आज भी वह राजपूत समाज में एक नेता की पहचान रखते हैं. जब उन्होंने अपनी “बिहार पिपुल्स पार्टी” बनाई थी तो बिहार के पूरे राजपूत समाज ने उन्हें सपोर्ट किया था. यह बात अलग है कि आनंद मोहन हमेशा से ब्लैकमेल की पॉलिटिक्स करते रहे हैं. 

‘बेटे को राजपूत का नेता बनाने की कोशिश’

संतोष कुमार ने कहा कि वर्ष 1995, 2000 या 2005 में जो भी हुआ और जिस पार्टी के साथ रहे हैं उसमें जेडीयू हो या आरजेडी सभी के खिलाफ उन्होंने ब्लैकमेल की पॉलिटिक्स की है. जब चेतन आनंद आरजेडी से चुनाव जीते उस समय भी ब्लैकमेल वाली पॉलिटिक्स कर चेतन को जेडीयू में शामिल कराया. अभी उनके बेटे को मंत्री नहीं बनाया गया इसको लेकर बयानबाजी कर रहे हैं. यह भी एक तरह से ब्लैकमेल वाली पॉलिटिक्स है. इस तरह के बयान से वह अब अपने बेटे को राजपूत का नेता बनाने की कोशिश में जुट गए हैं.

बिहार में क्या है राजपूतों की स्थिति?

आनंद मोहन राजपूत जाति से आते हैं और बिहार में राजपूतों की आबादी कुल जनसंख्या का 3.45% है. बिहार सरकार की ओर से जारी जाति आधारित गणना के अनुसार, राज्य में राजपूत जाति की कुल जनसंख्या 45,10,733 (लगभग 45.1 लाख) है. संख्या ज्यादा नहीं है लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजपूतों का दबदबा दिखा. पक्ष-विपक्ष से 33 विधायक राजपूत जाति से जीतकर आए हैं. 

एनडीए की नई सरकार में राजपूत जाति से चार मंत्री हैं. बीजेपी से दो संजय टाइगर और श्रेयशी सिंह मंत्री हैं तो वहीं जेडीयू से लेशी और चिराग की पार्टी से संजय सिंह को मंत्री बनाया गया है. ऐसी चर्चा थी कि आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को निशांत की टीम से मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ.



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