धार भोजशाला केस में इंदौर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए परिसर को मंदिर माना. जज ने कहा कि हम सभी वकीलों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने कोर्ट की सहायता की. हमने तथ्यों को देखा, ASI एक्ट को देखा. आर्कियोलॉजी एक विज्ञान है. उसके आधार पर मिले निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है. साथ ही संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को भी देखा जाना है. यह परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का केंद्र था. देवी सरस्वती का मंदिर था.
कोर्ट का आदेश
भोजशाला परिसर संरक्षित स्मारक है
यह मंदिर है
हिंदुओं को पूजा का अधिकार है
सरकार ASI वहां संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था बनाने पर भी विचार करे
सरकार ASI वहां संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था बनाने पर भी विचार करे
जहां तक वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने और मंदिर में स्थापित करने का सवाल है, केंद्र सरकार उस पर विचार करे
मुस्लिम पक्ष सरकार को मस्ज़िद के लिए जगह देने के लिए आवेदन दे सकता है
मस्ज़िद ऐसी जगह पर हो, जिससे दोनों पक्षों में विवाद न हो
मुस्लिम पक्ष सरकार को मस्ज़िद के लिए जगह देने के लिए आवेदन दे सकता है
मस्ज़िद ऐसी जगह पर हो, जिससे दोनों पक्षों में विवाद न हो
12 मई को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 2022 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. कोर्ट का फैसला करीब चार सालों के बाद आया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नियमित सुनवाई का आदेश दिया था. फैसले से पहले होई कोर्ट की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया.
11वीं सदी के इस स्मारक पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से दावा करते रहे.
