US-Israel-Iran War Impact : मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव की स्थिति लंबे समय से लगातार बनी हुई है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनाव का असर सिर्फ उन देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके घर तक पहुंच रहा है. खासकर भारत जैसे तेल और गैस पर निर्भर देश में, इस संघर्ष का असर सीधे आपकी रसोई और बजट पर पड़ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल सीजफायर तो है, लेकिन स्थिरता पर सवाल लगातार उठ रहे हैं. दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं हैं. हाल ही में ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को शांति प्रस्ताव भेजा, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ठुकरा दिया.
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उनके यूरेनियम भंडार के पास कोई कार्रवाई की, तो इसका खतरनाक परिणाम हो सकता है. हालांकि युद्ध बहुत दूर हो रहा हो, लेकिन इसके प्रभाव आपके घर तक महसूस किए जा रहे हैं, खासकर आपकी रसोई में, तेल, गैस और खाना पकाने के ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, आपूर्ति में कमी आ रही है, और रोजमर्रा के खर्च पर असर पड़ रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे इस युद्ध की आग ने आपके घर में जगह बनाई है.
युद्ध हजारों किमी दूर और असर आपकी रसोई पर
मिडिल ईस्ट में तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मूज जलडमरूमध्य पर पड़ा है. यह वह समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया का सबसे ज्यादा तेल और गैस गुजरता है. अगर यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक तेल की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ता है. भारत का ज्यादातर एलपीजी आयात इसी जलडमरूमध्य से आता है. जब यह मार्ग अस्थिर होता है, तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ जाती हैं. ऐसे में हजारों किमी दूर हो रहे इस युद्ध का असर आपकी रसोई पर पड़ रहा है.
कैसे इस युद्ध की आग ने आपके घर में बनाई जगह?
भारत सरकार ने इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए कई कदम उठाए हैं. संकट के दौरान उत्पादन 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ा कर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया. वैश्विक कीमतें बढ़ने के बाद एलपीजी की कीमतों में वृद्धि देखने को मिली, मार्च 2026 में घरेलू 14.2 किलो की सिलेंडर की कीमत 853 से बढ़कर 913 हो गई. वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत 1,768.50 से बढ़कर 1,884.50 हो गई. इस पूरे संघर्ष का सबसे सीधा असर आपके रसोई घर पर महसूस किया जा रहा है. एलपीजी की कीमतों में वृद्धि और संभावित आपूर्ति संकट के कारण आम परिवारों को महंगी गैस और ईंधन का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए युद्ध चाहे हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन इसके असर की छाया आपके घर की रसोई तक पहुंच गई है.
पेट्रोलियम कंपनियों का नुकसान
सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखने के कारण भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 हफ्तों में कंपनियों का कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. रोजाना लगभग 1,600-1,700 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ रहा है.
यह भी पढ़ें – India Foreign Policy: भारत ने किन किन देशों को बांटा हुआ है कर्ज, किस देश पर सबसे ज्यादा उधार है पैसा?
