वीजा-पासपोर्ट के झंझट खत्म, भूटान जाने का नया रास्ता खुला, जानिए कौन-सा भारतीय शहर बना ‘गेटवे’?


भूटान की यात्रा हमेशा से ही आकर्षक रही है. शांतिपूर्ण पहाड़, रंग-बिरंगे मोनेस्ट्री और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह देश भारतीय यात्रियों के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन है, लेकिन अक्सर लोग सोचते हैं कि भूटान जाने के लिए लंबा वीजा और पासपोर्ट का झंझट है. खासकर अगर आप केवल एक दिन के लिए वहां जाना चाहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का एक छोटा सा शहर इस परेशानी को आसान बना देता है. तो आइए जानते हैं कि वीजा और पासपोर्ट के बिना भूटान जाने का नया रास्ता कौन-सा है. इस भारतीय शहर का क्या नाम है जो भूटान से लगता है. 

भूटान जाने का नया रास्ता कौन-सा है?

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित जयगांव ऐसा सीमावर्ती शहर है, जहां से पैदल ही आप भूटान के फुएंत्शोलिंग तक जा सकते हैं. आप सुबह भारत में नाश्ता कर सकते हैं, दोपहर में भूटान में भोजन और शाम तक वापस अपने घर भारत लौट सकते हैं. यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी हवाई यात्रा या जटिल योजना के एक दिन में संभव है. जयगांव का मुख्य आकर्षण है भूटान गेट है. जो एक रंगीन और अलंकृत प्रवेश द्वार है, ये आपको भूटानी संस्कृति की झलक देता है. इसके अलावा, पास ही जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान और बुक्सा टाइगर रिजर्व जैसे प्राकृतिक स्थल हैं, जहां आप वन्य जीवन और हरे-भरे जंगलों का आनंद ले सकते हैं. 

भूटान में प्रवेश के लिए आसान नियम

भूटान की यात्रा भारतीय नागरिकों के लिए अब काफी आसान हो गई है. इसके लिए अगर आपके पास वैध पासपोर्ट है, तो आप सीधे यात्रा कर सकते हैं, हालांकि पासपोर्ट कम से कम छह महीने के लिए वैध हो. अगर पासपोर्ट नहीं है, तो आप मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) के साथ भी प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा, पासपोर्ट साइज तस्वीरें भी जरूरी हैं. 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए, अगर उनके पास पासपोर्ट नहीं है, तो मूल जन्म प्रमाण पत्र उनके प्रवेश के लिए जरूरी है. 

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भूटान में परमिट और शुल्क

भारतीय नागरिकों को भूटान वीजा की जरूरत नहीं होती, लेकिन परमिट लेना जरूरी है. सामान्य रूप से भूटान में प्रति रात 1,200 रुपये सतत विकास शुल्क (SDF) देना पड़ता है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता, और 6-12 साल के बच्चों के लिए यह आधा होता है.  अगर आप फुएंत्शोलिंग तक एक दिन की यात्रा कर रहे हैं, तो आप इस शुल्क से पूरी तरह बच सकते हैं. जयगांव के लोग अक्सर सीमा शुल्क से बचने के लिए शाम तक भारत लौट आते हैं. स्थानीय लोग फुएंत्शोलिंग तक सिर्फ 50-100 रुपये का छोटा शुल्क देकर जा सकते हैं. इसके आगे जाने के लिए अतिरिक्त परमिट की जरूरत होती है. साथ ही भारतीय पंजीकृत वाहन भूटान के सीमित क्षेत्र में बिना शुल्क के प्रवेश कर सकते हैं. अगर वाहन फुएंत्शोलिंग के रिंचेंडिंग चेकपोस्ट से आगे जाता है, तो प्रतिदिन 4,500 नु (लगभग 4,528 रुपये) का ग्रीन टैक्स देना होगा. 

जयगांव कैसे पहुंचे

जयगांव सिर्फ एक सीमावर्ती शहर नहीं है, बल्कि यहां कई प्राकृतिक और सांस्कृतिक आकर्षण हैं. भूटान गेट पर जाकर आप भूटानी संस्कृति की पहली झलक देख सकते हैं, जबकि पास के जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान और बुक्सा टाइगर रिजर्व में आप हाथी, बाघ और दुर्लभ पक्षियों सहित वन्य जीवन का अनुभव कर सकते हैं. तोर्शा नदी के किनारे स्थित सिकियाझोरा में नौका विहार और पहाड़ियों का आनंद लिया जा सकता है, वहीं हासिमारा छोटे चाय बागानों और बंगाली-भूटानी संस्कृति के मिश्रण के लिए जाना जाता है. जयगांव तक पहुंचने के लिए हवाई मार्ग से निकटतम बागडोगरा हवाई अड्डा और रेल मार्ग से अलीपुरदुआर जंक्शन, न्यू अलीपुरदुआर या न्यू कूच बिहार रेलवे स्टेशन उपयोगी हैं, जहां से कार या बस से आसानी से जयगांव पहुंचा जा सकता है. 

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