उत्तर कोरिया में तानाशाह के खिलाफ बगावत? किम जोंग उन को मिले 99.93% वोट, आखिर 0.7% ने किसे किया सपोर्ट?


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उत्तर कोरिया में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों ने एक बार फिर से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के नेतृत्व वाली वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया ने इस चुनाव में 99.93 प्रतिशत वोट के साथ लगभग पूर्ण बहुमत हासिल की. उत्तर कोरिया में यह चुनाव इसी महीने रविवार (15 मार्च, 2026) को आयोजित किया गया था, जिसमें 15वीं सुप्रीम पीपल्स असेंबली के सदस्यों को चयनित किया गया.

देश के सरकारी न्यूज एजेंसी KCNA के मुताबिक, इस चुनाव में न सिर्फ किम की पार्टी को भारी समर्थन मिला, बल्कि मतदान प्रतिशत भी 99.99 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुत असामान्य माना जाता है. हालांकि, इस चुनाव में जिस चीज ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा अपनी ओर से खींचा, वह वो बाकी बचे 0.07 प्रतिशत वोट हैं, जो सुप्रीम लीडर किम जोंग उन के समर्थन में नहीं पड़े. ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि किम जोंग उन के शासन में उत्तर कोरिया की जनता ने किस अन्य व्यक्ति का समर्थन किया.

किम के खिलाफ किसने जीते 0.07% वोट?

दरअसल, उत्तर कोरिया का चुनावी सिस्टम दुनिया के बाकी देशों से काफी अलग है. यहां हर चुनावी क्षेत्र में सिर्फ एक ही उम्मीदवार होता है, जिसे सतारूढ़ शासन की तरफ से पहले ही अनुमोदित किया जाता है. ऐसे में वोटरों के पास दो ही ऑप्शन होते हैं, पहला या तो वे अनुमोदित किए गए उम्मीदवार को स्वीकार करें, या दूसरा ऑप्शन उसे अस्वीकार कर दें.

यही कारण है कि चुनावी नतीजों में दिखने वाला 0.07 प्रतिशत वोट किसी विपक्षी पार्टी या नेता को नहीं मिला. यहां इतने प्रतिशत लोगों ने आधिकारिक रूप से अनुमोदित उम्मीदवारों के लिए ‘नहीं’ या अस्वीकार करते हुए वोट किया है.

कई दशकों के बाद उत्तर कोरिया ने इस बात को किया स्वीकार

उत्तर कोरिया में इस बार के संसदीय चुनावों इस बात के लिए बेहद खास माने जा रहे हैं कि देश की सरकारी मीडिया चैनल ने कई दशकों के बाद इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि कुछ लोगों ने उम्मीदवारों के खिलाफ वोट दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1957 के बाद यह पहली बार है, जब अस्वीकार किए गए वोटों को सार्वजनिक किया गया है.

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