असम विधासनभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. नौगांव सीट से लगातार दो बार के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उनका इस्तीफा ऐसे महत्वपूर्ण समय में आया है जब असम में राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कमर कस रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में नवज्योति तालुकदार ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सूत्रों के मुताबिक बोरदोलोई आने वाले दिनों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकते हैं.
असम में पार्टी को मजबूत करने में निभाई बड़ी भूमिका
असम में दशकों से कांग्रेस के एक प्रमुख चेहरा रहे बोरदोलोई ने 1998 में मार्गेरिटा विधानसभा से विधायक चुने जाने के साथ ही अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने लगातार चार कार्यकाल तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया और 1998 से 2016 तक विधायक रहे. कांग्रेस में अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान, उन्होंने 2001 से 2015 के बीच असम सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री पद भी संभाले. उन्हें असम में पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिना जाता था और उन्होंने राज्य में संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
बीजेपी में शामिल हो सकते हैं प्रद्युत बोरदोलोई
प्रद्युत बोरदोलोई ने 2019 में नौगांव लोकसभा से जीत दर्ज की, जिससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ा. जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच बोरदोलोई के प्रभाव को देखते हुए उनका इस्तीफा देना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. हालांकि बोरदोलोई की ओर से उनके अगले राजनीतिक कदम के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.
प्रद्युत बोरदोलोई लंबे समय से कांग्रेस के वफादार नेता रहे हैं. वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान में अहम भूमिका निभाई थी. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में असम में कांग्रेस की लगातार हार और 2021 विधानसभा चुनाव में महज 29 सीटों पर सिमटने से पार्टी के कई नेताओं में असंतोष बढ़ा था. बोरदोलोई ने भी पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक ढांचे और केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों पर असहमति जताई थी.
असम में कांग्रेस को बड़ा झटका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बोरदोलोई औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल होते हैं तो इससे नौगांव और आसपास के क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है. दूसरी ओर, कांग्रेस को अपने एक वरिष्ठ नेता के बिना इस निर्वाचन क्षेत्र में अपना समर्थन बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
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Input By : ऋतुराज फुकन
