16 मार्च को हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस अपने सभी विधायकों को शिमला लेकर गई है. चंडीगढ़ में नेता विपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा के घर पर आज (13 मार्च) विधायकों की मीटिंग हुई. मीटिंग के लगभग पांच को छोड़ कर बाकी विधायक दो छोटी टूरिस्ट बसों में और कुछ निजी गाड़ियों में हिमाचल प्रदेश रवाना हो गए. कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि सारे विधायक एकजुट हैं लेकिन हिमाचल में विधायकों के लिए ट्रेनिंग होगी कि किस प्रकार मतदान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सभी विधायक 16 मार्च को ही अब आयेंगे और सीधा विधानसभा में मतदान करने पहुंचेंगे.
मैदान में कौन-कौन उम्मीदवार?
हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों खाली हो रही हैं. लेकिन मैदान में तीन उम्मीदवार हैं. बीजेपी ने संजय भाटिया और कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को मैदान में उतारा है. ये सीटें बीजेपी के राज्यसभा सांसदों किरण चौधरी और राम चन्दर जांगड़ा का कार्यकाल खत्म होने के कारण खाली हुई हैं. बीजेपी नेता सतीश नांदल ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है. अब दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए चुनाव कड़ा हो सकता है.
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कौन हैं संजय भाटिया?
संजय भाटिया को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है. उनके पास संगठनात्मक राजनीति का लंबा अनुभव है और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे हैं. वे पहले भाजपा के राज्य महासचिव भी रह चुके हैं. संजय भाटिया संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति, सांसदों के वेतन और भत्तों की संयुक्त समिति और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की परामर्श समिति के सदस्य भी रह चुके हैं.
कर्मवीर सिंह बौद्ध के बारे में जानें
वहीं, इंडियन नेशनल कांग्रेस ने दलित वोट बैंक मजबूत करने के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा है. कर्मवीर सिंह बौद्ध राज्य सिविल सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं.
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सतीश नांदल कितने मजबूत उम्मीदवार?
सतीश नांदल पहले इंडियन नेशनल लोक दल के नेता रह चुके हैं और वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं. उन्होंने 2009, 2014 और 2019 में गढ़ी सांपला-किलोई विधानसभा सीट से हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके.
90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 वोटों की जरूरत होती है. फिलहाल, भाजपा के पास तीन निर्दलीयों सहित 48 विधायकों का समर्थन है, जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं. निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नांदल के उतरने से चुनाव और दिलचस्प हो गया है.
