पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात और ईरान-अमेरिका के जंग के बीच गुरुवार (12 मार्च, 2026) को भारत से सऊदी अरब के बीच हवाई संपर्क एक बार फिर से बहाल हो गया है. भारतीय विमानन कंपनियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के लिए उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया है.
भारतीय विमानन कंपनियों की ओर से हवाई सेवा बहाल होने के पहले दिन ही कुल तीन उड़ानें संचालित की गईं. इनमें से दो उड़ानें एअर इंडिया और इंडिगो एयरलाइंस ने मुंबई के लिए भरीं, जबिक तीसरी उड़ान एअर इंडिया एक्सप्रेस ने कालीकट के लिए संचालित कीं. इन उड़ानों के साथ भारत और सऊदी अरब के बीच आने-जाने के लिए माध्यम एक बार फिर से स्थापित हो गया है.
पिछले 12 दिनों में खाड़ी देशों से कितने यात्री भारत लौटे?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी, 2026 से 11 मार्च, 2026 यानी पिछले 12 दिनों में खाड़ी देशों से भारत लौटने वाले यात्रियों की कुल संख्या 1,50,457 रही. जबकि गुरुवार (12 मार्च, 2026) को पश्चिम एशिया के कई शहरों- अबू धाबी, दुबई, फुजैराह, जेद्दा, मस्कट, रास अल खैमाह, रियाद और शारजाह से भारत के लिए कुल 57 इनबाउंड फ्लाइट्स निर्धारित की गई हैं.
हवाई किरायों को लेकर मंत्रालय ने दिया बयान
इस बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व के तनाव के बीच हवाई उड़ानों के लिए किराये पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है. ताकि हवाई टिकट की कीमतें वाजिब रहें और यात्रियों को बिना किसी कारण के परेशानी और महंगाई का सामना न करना पड़े.
इन कारणों से बढ़ सकता है किराया
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते को ईरान की ओर से बंद करने के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है. जिस कारण से जेट फ्यूल के दामों में भी तेजी आ सकती है.
उल्लेखनीय है कि जेट फ्यूल एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है. इसके अलावा, दुनिया के करीब 10 से 12 देशों ने अपने एयरस्पेस को बंद कर रखा है, जिससे विमान अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लंबे रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं.
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