गौरव गोगोई ने कहा, ‘ये अपेक्षा थी कि उस दिन चेयर न्यूट्रल रहेगी. LOP को कई बार टोका गया. स्पीकर LOP से बार बार वेरिफाई करने को कहते रहे. नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि दुनिया की दूसरी जगहों में जहां जहां किसी का नाम आया, वहां इस्तीफे हुए. भारत में भी मंत्री का नाम आया था। ये वेरिफाई करना आसान नहीं है, एक मंत्री का नाम है, अंतरराष्ट्रीय मामला है.राहुल कहते रहे कि मुझे बोलने दिया जाए. स्पीकर ने LOP के खड़े रहते हुए दूसरे स्पीकर को बोलने को कहा. ये परंपराओं के खिलाफ है. कुछ दिन बाद शशि थरूर बोल रहे थे और उनका माइक स्विच ऑफ कर दिया गया.’
गोगोई ने कहा, ‘सुषमा स्वराज जी ने कहा था एक बार लोकतंत्र पर कि भारतीय लोकतंत्र के मूल में एक भाव है. ये भाव ये है कि हम एक दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन शत्रु नहीं. हम विरोध विचारधारा, नीतियों के आधार पर करते हैं. ये भारत के लोकतंत्र का मूल भाव है, लेकिन आज कांग्रेस, टीएमसी, सपा या विपक्ष के नेता बोलना चाहते हैं, तो उन्हें बोलने नहीं दिया जाता है. नेहरू जी ने एक बार कहा था कि स्पीकर एक तरह से देश की स्वतंत्रता के प्रतीक हैं, लेकिन आज बोलने की आजादी कहां है.’
