लखनऊ: गुरुकुल में पढ़ने गए 11 साल के बच्चे की संदिग्ध मौत, घर के बाहर फेंका शव, गांव में हड़कंप


महाराजपुर थाना क्षेत्र के गैरिया गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई जब गुरुकुल में पढ़ने गए 11 वर्षीय किशोर का शव संदिग्ध हालात में घर के बाहर छोड़कर अज्ञात कार सवार फरार हो गए. घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया, वहीं पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है.

गैरिया गांव निवासी मजदूर नरेंद्र कुमार द्विवेदी उर्फ पप्पू, जो रूमा स्थित एक निजी फैक्ट्री में काम करते हैं, अपने परिवार का भरण-पोषण मेहनत मजदूरी से करते हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद वह अपने बच्चों को पढ़ाकर बेहतर भविष्य देना चाहते थे.

इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने इकलौते बेटे दिव्यांश (11) का दाखिला लखनऊ के आलमनगर स्थित एक गुरुकुल में 15 अप्रैल को कराया था, जहां निःशुल्क वैदिक शिक्षा देने का दावा किया गया था.

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घर के बाहर शव छोड़कर फरार हुए बदमाश

परिजनों के अनुसार, दिव्यांश की अपनी बहन दीपिका से रोज फोन पर बातचीत होती थी. मंगलवार सुबह भी दोनों की बात हुई थी और बच्चा सामान्य व खुश था. लेकिन बुधवार सुबह एक रिश्तेदार ने सूचना दी कि दिव्यांश सीढ़ियों से गिरकर घायल हो गया है.

परिजन लखनऊ जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि सुबह करीब 9 बजे एक कार से गुरुकुल संचालक कन्हैया मिश्रा बच्चे को लेकर गांव पहुंचा और घर से कुछ दूरी पर उसे छोड़कर मौके से फरार हो गया. जब परिजन मौके पर पहुंचे तो बच्चा चादर में लिपटा हुआ था और उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे.

परिजनों ने लगाया ये आरोप

घायल अवस्था में उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने हैलट अस्पताल रेफर कर दिया. हालांकि, तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी. परिजनों का आरोप है कि दिव्यांश के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान थे, साथ ही सिगरेट से दागने जैसे घाव भी दिखाई दिए.

उन्होंने बच्चे के साथ बर्बरता और कुकर्म की आशंका जताई है. घटना की सूचना पर एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा, एसीपी चकेरी अभिषेक कुमार पांडेय और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

शव से लिपटकर खूब रोया पिता

बेटे की मौत की खबर मिलते ही फैक्ट्री में काम कर रहे नरेंद्र द्विवेदी घर पहुंचे और बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगे. उन्होंने कहा कि मेरा एक ही बेटा था, उसी के सहारे बुढ़ापा काटने का सपना देखा था. अच्छी और मुफ्त शिक्षा के लिए उसे गुरुकुल भेजा था, लेकिन अब वह हमेशा के लिए दूर हो गया.

किशोर की संदिग्ध मौत से पूरे गांव में शोक और गुस्से का माहौल है. बहन दीपिका ने बताया कि दाखिले के समय दिव्यांश बेहद खुश था और पढ़ाई में भी होनहार था. दिव्यांश के चाचा जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया कि बच्चे के साथ बर्बरता की गई है और दोषियों को उसी तरह सख्त सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि शरीर के कई हिस्सों पर जलाने और गंभीर चोटों के निशान हैं, जिससे हत्या से पहले अत्याचार की आशंका और गहरा गई है.

मामले की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस मामले की जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत के असल कारणों का खुलासा हो सके. इस मामले में पुलिस ने गुरुकुलसंचालक और उसकी दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है.एफआईआर दर्ज हो रही है. और जांच टीम जल्द लखनऊ आकर पूरे प्रकरण की जांच करेगी.

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