Tamil Nadu Election Result 2026: तमिलनाडु में CM बनने के लिए किसका हाथ थामेंगे विजय? TVK से रिश्ते में कौन बंधेगा- DMK या AIADMK


तमिलनाडु की राजनीति पिछले 50 सालों से DMK या फिर AIADMK के नाम पर बंटी हुई थी, लेकिन 4 मई 2026 को एक नया नाम उभरकर सामने आया- तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK). विजय थलापति की पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से पास है. ऐसे में सबसे अहम सवाल पूछा जा रहा है कि विजय पुरानी राजनीति के किस खेमे के साथ सरकार बनाएंगे और इस सत्ता समीकरण की ‘इनसाइड स्टोरी’ क्या है.

सवाल 1: सबसे पहले यह तो बताइए, चुनाव के ताजा नतीजे क्या कहते हैं?

जवाब: मई 2026 में हुए विधानसभा चुनावों ने लगभग एक भूचाल ला दिया है. TVK सिर्फ अपने पहले ही चुनाव में 106 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है. सबसे बड़ा झटका राज्य के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को लगा है, जो अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर में भी पीछे चल रहे हैं. उनके बेटे और डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है. हालांकि, AIADMK ने भी 67 सीटों पर लीड के साथ वापसी की है, जबकि DMK   62 सीटों पर सिमटती हुई दिख रही है.

सवाल 2: तो फिर सरकार बनाने के लिए विजय किसके साथ जाएंगे?

जवाब: ऐसा लग रहा है कि तस्वीर परेशान करने वाली है. दरअसल विजय ने न तो पहले किसी गठबंधन में रहना स्वीकार किया और न ही अब सीधे तौर पर किसी से बातचीत की है. वे लगातार एक ‘स्वतंत्र विकल्प’ के रूप में पेश हो रहे हैं. फिलहाल विजय सबसे बड़ी पार्टी के नेता और सिंगल लार्जेस्ट पार्टी होने के नाते पहले सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं, बिना किसी सहारे के. लेकिन अगर बहुमत से कम रहे तो उनके पास DMK या AIADMK का ऑप्शन बचता है.

सवाल 3: क्या विजय AIADMK के साथ गठबंधन कर सकते हैं?

जवाब: यह रास्ता जितना आसान दिखता है, उतना ही पेचीदा है. इसकी 3 बड़ी वजहें हैं:

  1. पावर शेयरिंग का समीकरण: AIADMK ने अपने साथ बीजेपी और PMK जैसे सहयोगियों को लेकर एक मजबूत संख्या पहले से ही बना रही है. TVK, AIADMK और NDA का गठबंधन बहुमत के आंकड़े को पार कर सकता है.
  2. प्रैक्टिकल पॉलिटिक्स का फॉर्मूला: एक्सपर्ट्स का मानना है कि AIADMK के लिए सत्ता से बाहर सालों बिताने के बाद, एक पोस्ट-पोल अलायंस वापसी का सुनहरा मौका हो सकता है. अगर AIADMK अपने दम पर सरकार नहीं बना पाती तो TVK के साथ हाथ मिलाना ही समझदारी होगी.
  3. लड़ाई का सियासी गणित: यह पुराने घावों को हरा कर ही संभव है. AIADMK चीफ ई. पलानीस्वामी ने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनकी TVK से कोई एलायंस नहीं होगा. इसके अलावा शुरुआती बयानों में विजय ने कथित तौर पर सीएम का चेहरा और 50% सीटों की मांग की थी, जो AIADMK को बिल्कुल मंजूर नहीं थी.

सवाल 4: क्या विजय DMK की तरफ रुख कर सकते हैं?

जवाब: इसकी संभावना बेहद कम है. दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने DMK को सबसे कड़ी शब्दों में आलोचना की है. उनकी पूरी चुनावी रैलियां ‘भ्रष्टाचार’ और परिवारवाद के खिलाफ थीं, जिसका निशाना DMK था. ऐसे में चुनाव के तुरंत बाद DMK के साथ जाना उनके सारे चुनावी एजेंडे पर पानी फेर देगा. पॉलिटिकली यह बेहद अटपटा और भरोसेमंद नहीं लगेगा. हालांकि, AIADMK और DMK दोनों ही TVK के साथ गठबंधन की अटकलों को बिल्कुल खारिज कर रहे हैं. विजय की पार्टी भी इसे ‘अफवाह’ बता रही है.

सवाल 5: अभी तो दोनों साफ मना कर रहे हैं, फिर आखिर में स्थिति कैसे बनेगी?

जवाब: यह बिल्कुल शतरंज की चाल की तरह है. भले ही सब कुछ मना कर रहे हों, लेकिन हमेशा पोस्ट-पोल सीनारियो में ही असली गणित पकड़ में आता है.

  • नंबर गेम: मान लीजिए TVK 100 सीटों पर जीतता है, तो उसे 18 सीटों की जरूरत होगी. ऐसे में वह AIADMK (67) या DMK (62) से 18-20 सीटों का समर्थन मांग सकते हैं. वह बिना पूरा गठबंधन बनाए सिर्फ एक ‘बाहरी समर्थन’ लेकर सरकार चला सकता है. यह सबसे व्यवहारिक समाधान होगा.
  • सियासी दबाव: अगर TVK बहुमत के करीब पहुंच जाती है, तो मतदाताओं और नेताओं का दबाव सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का ही होगा. ऐसे में पुरानी दुश्मनी या मधुर संबंधों से ज्यादा अंकगणित ही मायने रखेगा.
  • विजय का मास्टर स्ट्रोक: चूंकि TVK ने सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इसलिए पार्टी के लिए बाहरी सहारा लेना अपनी राजनीतिक पहचान के खिलाफ नहीं होगा. वे एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने या सीएम पद के लिए सौदेबाजी करने में सक्षम होंगे.

इसके अलावा दूसरे छोटे दल जैसे PMK (7 सीटें) और कांग्रेस (3 सीटें) भी ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हो सकते हैं, लेकिन असली गेंद तो विजय के पाले में है.



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