हम सब सपने देखते हैं, सपने ही तो जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हमारा फ्यूल होता है, लेकिन क्या सारे सपने सच होते हैं? क्या भगवान को हमारे सपनों के बारे में पता होता है? भगवान हमारे सारे सपने सच क्यों नहीं करते? कौन आ जाता है हमारे सपनों के बीच? टीवीएफ एक बार फिर से सपनों और हकीकत की बीच झूलती इस सीरीज का नया सीजन लेकर आया है, ये सीरीज आपको कुछ देकर जाती है, इसमें कुछ कमियां भी हैं लेकिन बावजूद इसके ये सीरीज आपको ये अहसास कराएगी कि सपने सच होते हैं और कई बार जब सपने सोच नहीं होते तो क्यों नहीं होते. प्राइम वीडियो पर इसका दूसरा सीजन आ गया है जो बढ़िया है.
कहानी
दो अलग अलग नौजवानों के अलग अलग सपने हैं, एक को एक्टर बनना है, तो वो कास्टिंग कंपनी में नौकरी कर लेता है कि शायद यहीं से कुछ हो जाए. एक रियल एस्टेट एजेंट है,उसे अपने पिता को इज्जत दिलानी है और अपने मामा को एमपी बनने से रोकना है. इनके सपनों के बीच कौन आता है और क्या ये सपने पूरे होते हैं ये आप इस सीरीज के 5 एपिसोड्स में देख सकते हैं.
कैसी है ये सीरीज
ये एक बढ़िया सीरीज है, इस सीरीज के कुछ सीन तो ऐसे हैं कि वो आपको लाइफ लेसन दे जाएंगे. एक जगह जब रियल एस्टेंट एजेंट जिमी एक कस्टमर को घर खरीदने के लिए राजी करता है तो आप हैरान रह जाते हैं कि ग्राहक के दिमाग से किस तरह से खेला जाता है. ये सीरीज दो लोगों के सपनों की बीच झूलती रहती है. कहानी में ऐसा कुछ नहीं होता है कि बवाल हो जाए, कोई बड़ा ट्विस्ट आ जाए लेकिन ये सीरीज आपको कुछ ना कुछ सिखाती रहती है. ये आपको कुछ ना कुछ महसूस कराती है. सीरीज खत्म होने पर आप सोचेंगे कि कहानी तो कुछ खास थी नहीं लेकिन यार मजा तो आया और काफी कुछ समझा भी. सीरीज थोड़ी सी लंबी लगती है, 1-1 घंटे के 5 एपिसोड कई जगह थोड़ा अखरते हैं लेकिन बहुत थोड़े वक्त के लिए, किरदारों से आप इस तरह से कनेक्ट कर जाते हैं कि उनके सपनों के साथ चलना शुरू करत देते हैं. सीरीज का स्क्रीनप्ले अगर थोड़ा सा और बेहतर कर दिया जाता तो ये मास्टरपीस बन जाती लेकिन अब भी ये एक शानदार सीरीज है जिसे हर हाल में देखना चाहिए. टीवीएफ ने एक बार फिर से ऐसी सीरीज बनाई है जो कुछ वक्त तक आपके साथ रहेगी, सीरीज में गालियां और वॉयलेंस है तो फैमिली के साथ तो ना ही देखें.
एक्टिंग
अंबरीश वर्मा ने कमाल का काम किया है, हर फ्रेम में वो छाए हुए हैं. वो इतने नेचुरल लगे हैं कि आपको लगेगा कि ये आदमी बड़े पर्दे के लिए ही बना है. अपने पापा के लिए ये शख्स जो कुछ करता है वो आपको हिला डालता है. अंबरीश का परफॉर्मेंस इस सीरीज की सबसे बड़ी हाइलाइट है. परमवीर सिंह चीमा एक बार फिर दिल जीत लेते हैं. अपनी मासूमियत से वो आपको अपना दीवाना बना लेते हैं, एक स्ट्रगलिंग एक्टर के किरदार को उन्होंने जैसे जी लिया है. विजयंत कोहली अपने रोल में पूरी तरह से फिट हैं,वो मामा लगते हैं और मामा जैसा बिहेव करते हैं. अभिषेक चौहान का काम कमाल है , उनका कैरेक्टर जब स्विच करता है तो आप चौंक जाते हैं. निधि शाह अच्छी लगी हैं. खुशाली कुमार की स्क्रीन प्रेंजेंस बहुत अच्छी है. छोटे से केमियों में नवीन कस्तूरिया दिल जीत लेते हैं.
राइटिंग और डायरेक्शन
अंबरीश वर्मा ने सीरीज लिखी है और डायरेक्ट की है, और उनका काम जबरदस्त है, कुछ सीन तो बहुत ज्यादा कमाल के हैं, राइटिंग इस सीरीज की जान है और अगर स्क्रीनप्ले थोड़ा सा बेहतर होता और सीरीज हल्की सी छोटी होती तो ये और ज्यादा कमाल लगती है, डायरेक्शन काफी अच्छा है.
कुल मिलाकर ये सीरीज जरूर देखिए प्राइम वीडियो पर
रेटिंग- 3.5 स्टार्स
