Explained: पश्चिम बंगाल के पहले फेज में रिकॉर्ड तोड़ 90% मतदान! SIR का असर या सत्ता पलट, बंपर वोटिंग के मायने क्या?


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में गुरुवार को बंपर वोटिंग हुई. बंगाल की 294 सीटों में से 152 सीटों पर पहले फेज में 89.93% मतदान हुआ, यानी इतिहास में पहली बार सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है. चुनाव आयोग के आंकड़े शाम 6 बजे तक हैं. इनमें बदलाव हो सकता है. ममता ने वोटिंग के बाद कहा- बंगाल की जनता ने SIR के विरोध में बंपर वोटिंग की है, जबकि विपक्ष का कहना है कि अब बंगाल में बीजेपी की सरकार आ रही है. बंगाल में मतदान की हवा इतनी तेज चली कि सभी मुद्दे पीछे रह गए. एक्सप्लेनर में समझते हैं बंगाल में मतदान का जादू…

सवाल 1: पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव में कुल कितना मतदान हुआ और यह रिकॉर्ड क्यों है?
जवाब: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 89.93% वोटिंग हुई, जो 2021 के 82.30% से 7% से ज्यादा है और देश का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. यह चुनावी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस गहरी राजनीतिक हलचल और सामाजिक सक्रियता का संकेत है जो इस बार के चुनाव को असाधारण बना रही है. यह रिकॉर्ड विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बना, जिसमें 91 लाख डुप्लिकेट नाम हटाए गए थे. कुल 3.44 करोड़ मतदाताओं में से 3.11 करोड़ ने वोट डाला है.

बंगाल में दोपहर 3 बजे तक ही करीब 78% से ज्यादा वोटिंग हो जाना इस बात का संकेत था कि दिन के आखिरी घंटों में बड़ा उछाल आएगा और वही हुआ. यह पैटर्न पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रकृति को भी दर्शाता है, जहां ग्रामीण इलाकों, महिलाओं और देर से मतदान करने वाले समूहों की बड़ी भूमिका रहती है.

पहले चरण में कुल 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जो 16 जिलों में फैली हुई हैं. इतने बड़े पैमाने पर चुनावी प्रक्रिया के बावजूद मतदान का इतना ऊंचा स्तर बताता है कि जनता इस चुनाव को लेकर कितनी गंभीर और सक्रिय है.

दिनभर के ट्रेंड को देखें तो सुबह से ही पोलिंग बूथों पर लंबी कतारें दिखने लगी थीं. सुबह 9 बजे तक जहां मतदान करीब 15-18% के बीच था, वहीं 11 बजे तक यह 40% के पार चला गया. इसके बाद दोपहर में भी यह रफ्तार कम नहीं हुई और 3 बजे तक लगभग 78% का आंकड़ा पार हो गया. यह लगातार बढ़ता ग्राफ इस बात का संकेत है कि वोटरों में किसी तरह की उदासीनता नहीं थी, बल्कि वे संगठित तरीके से मतदान के लिए निकल रहे थे.

सवाल 2: बंगाल के किन जिलों में सबसे ज्यादा मतदान हुआ और रिकॉर्ड कहां टूटे?
जवाब: क्षेत्रवार रुझानों में यह साफ दिखा कि उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों में सबसे ज्यादा मतदान हुआ. कई इलाकों में दोपहर तक ही 80% के आसपास मतदान दर्ज कर लिया गया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड जैसी स्थिति है. ग्रामीण और बॉर्डर एरिया में परंपरागत रूप से ज्यादा मतदान होता है, लेकिन इस बार यह ट्रेंड और ज्यादा मजबूत दिखाई दिया.

जिला कुल मतदाता (लाख में) वोटिंग % 2021 से कितना ज्यादा
बीरभूम 32.4 92.8 11.2%
कूचबिहार 28.1 92.3 9.8%
झारग्राम 12.6 91.7 12.4%
दक्षिण दिनाजपुर 14.2 91.2 10.5%
पश्चिम मेदिनीपुर 21.8 90.9 8.7%
कलिम्पोंग 3.4 78.5 2.1%

सवाल 3: किन VIP सीटों पर वोटिंग के रिकॉर्ड टूटे?
जवाब: सीटों पर सटीक वोटिंग प्रतिशत चुनाव आयोग कुछ देर बाद जारी करता है, लेकिन शुरुआती संकेत यही बताते हैं कि VIP सीटों पर भी औसत से ज्यादा मतदान हुआ. यह चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बनाता है.

सीट उम्मीदवार वोटिंग %
माथाभांगा (SC) शुभेंदु अधिकारी (बीजेपी) 93.2
कूचबिहार उत्तर निशीत प्रमाणिक (बीजेपी) 92.8
फाल्टा अभिषेक बनर्जी (TMC) 89.5
तोटो जॉन बार्ला (बीजेपी) 91.1

सवाल 4: पश्चिम बंगाल में वोटिंग के दौरान हिंसक घटनाएं कहां-कहां हुईं?
जवाब: वोटिंग के दौरान बंगाल में छिटपुट हिंसक घटनाएं हुईं और कई जगह EVM खराब होने की शिकायत भी आई:

  • पश्चिम बंगाल के दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से बीजेपी कैंडिडेट सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ.
  • बर्नपुर के रहमत नगर इलाके में आसनसोल साउथ सीट से बीजेपी उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर हमला हुआ. अग्निमित्रा ने बताया कि एक मतदान केंद्र से बाहर निकलते समय उनकी कार पर पत्थर फेंके गए.
  • बीरभूम के बोधपुर गांव में EVM खराब होने के बाद लोगों ने पुलिस और सेंट्रल फोर्स पर पथराव कर दिया. पुलिस की गाड़ी में तोड़फोड़ भी की. घटना में कई सुरक्षाकर्मी घायल हो गए.
  • सिलीगुड़ी में वोटिंग के दौरान बीजेपी और TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई.
  • मालदा के एक बूथ पर EVM खराब होने से हंगामा हो गया. लोगों ने चुनाव अधिकारी को घेर लिया और आपत्ति जताई.
  • मुर्शिदाबाद के नौदा में वोटिंग से पहले बुधवार देर रात देसी बम फेंका गया था, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे.

बंगाल में हालात पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रहे. कई जिलों से छिटपुट हिंसा, झड़प और बमबाजी की खबरें सामने आईं. कई बूथों को पहले से ही ‘सुपर सेंसिटिव’ घोषित किया गया था. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का वोट डालने के लिए बाहर निकलना यह दिखाता है कि चुनाव को लेकर डर से ज्यादा भागीदारी की भावना हावी रही. यह पहलू बंगाल की चुनावी संस्कृति का एक अहम हिस्सा भी है, जहां राजनीतिक टकराव के बावजूद मतदान प्रतिशत अक्सर ऊंचा रहता है.

सवाल 5: पश्चिम बंगाल में 90% चुनाव किस ओर इशारा करता है?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा वोटिंग का कोई एक सीधा मतलब नहीं होता. यह एंटी-इंकम्बेंसी यानी सरकार के खिलाफ गुस्से का संकेत भी हो सकता है और प्रो-इंकम्बेंसी यानी सरकार के समर्थन में जुटान का भी. पश्चिम बंगाल के मामले में यह ज्यादा संभावना जताई जा रही है कि चुनाव बेहद करीबी और कांटे का है, इसलिए दोनों पक्षों के समर्थक बड़ी संख्या में मतदान के लिए निकले. इसके पीछे एक बड़ा कारण राज्य में गहरा राजनीतिक ध्रुवीकरण भी है, जहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच सीधा और तीखा है.

इसके अलावा, चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर उठे विवादों ने भी लोगों को ज्यादा सतर्क और सक्रिय बनाया. जब वोटर लिस्ट से नाम हटने या गड़बड़ी की खबरें आती हैं, तो आमतौर पर लोग मतदान के दिन ज्यादा संख्या में बूथ तक पहुंचने की कोशिश करते हैं ताकि उनका वोट दर्ज हो सके. इसी तरह महिला वोटरों और ग्रामीण आबादी की सक्रिय भागीदारी ने भी कुल प्रतिशत को ऊपर खींचने में बड़ी भूमिका निभाई.

अगर इसे राष्ट्रीय संदर्भ में देखें तो यह आंकड़ा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. आमतौर पर भारत में विधानसभा चुनावों में 60 से 75 प्रतिशत के बीच मतदान होता है, जबकि 80% पार करना ही बड़ी बात माना जाता है. ऐसे में लगभग 90% के आसपास पहुंचना एक असाधारण स्थिति है, जो दिखाता है कि पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक भागीदारी का स्तर बेहद ऊंचा है और लोग चुनाव को सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि अपने अधिकार और प्रभाव के रूप में देखते हैं.



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