- कैराना सांसद इकरा हसन ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सवाल उठाए.
- उन्होंने सभी अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए कोटे में कोटा मांगा.
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए अलग प्रावधान की मांग की.
- सरकार पर आरक्षण को परिसीमन के पीछे छिपाने का आरोप लगाया.
उत्तर प्रदेश स्थित कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने लोकसभा में पेश किए गए ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम और परिसीमन (डीलिमिटेशन) एवं जनगणना को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. इस दौरान वह अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से एक कदम आगे बढ़ गईं. कैराना सांसद के बयान के इस हिस्से को उनका स्मार्ट मूव माना जा रहा है.
बता दें अखिलेश और आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव ने महिला आरक्षण के तहत मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की मांग की थी जिसे गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने असंवैधानिक मांग करार दिया था. अब इसी मुद्दे पर इकरा ने अलग दांव खेला.
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इकरा ने 16 अप्रैल 2026, गुरुवार को लोकसभा में कोटे में कोटा की मांग करते हुए कहा- देश की रिलीजियस माइनॉरिटीज की महिलाओं को भी एक कोटा इसमें दिया जाना चाहिए. यानी इकरा ने सिर्फ मुस्लिम महिलाओं की बात न करते हुए सभी अल्पसंख्यकों के लिए रिजर्वेशन की मांग की है.
चुनावी खर्च में राज्य सहयोग दे- इकरा
उन्होंने ओबीसी और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण (सब-कोटा) की मांग की.सांसद ने यह भी सुझाव दिया कि ओबीसी, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग की महिलाओं के लिए अलग प्रावधान किए जाएं तथा चुनावी खर्च में राज्य सहयोग दे.
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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, इसलिए अब मुद्दा महिला आरक्षण का नहीं है, बल्कि यह चुनावी फायदे से जुड़ा हुआ है.इकरा हसन ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को परिसीमन और जनगणना के आड़ में छिपा रही है, और यह महिलाओं के अधिकारों के साथ धोखा है. उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने कहा था कि महिला आरक्षण 2034 के बाद लागू होगा, और अब इसे 2029 में लागू करने की बात की जा रही है, जो विरोधाभासी है.
