पाकिस्तान की वो ‘डील’, जिससे न चाहते हुए भी ईरान वॉर में इस्लामाबाद कूदने को हो जाएगा मजबूर


Iran US War: सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के डिफेंस पैक्ट से जुड़ी बातें अब उसे ईरान युद्ध में खींच सकती है. जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान कोशिशें कर रहा है, तो वहीं, अब डिफेंस पैक्ट एक बड़ी मुसीबत के तौर पर उसके सामने है. 

पाकिस्तान ने सऊदी अरब में स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के तहत फाइटर जेट तैनात किए हैं. शनिवार को जिस वक्त पाकिस्तान के फाइटर जेट किंग अब्दुल अजीज एयरबेस पर उतर रहे थे, उसी दिन पाकिस्तान ईरान अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा था.  

ऐसे में बातचीत टूट गई. अब खबर है कि दोनों पक्ष एक बार फिर 21 अप्रैल को 2 हफ्ते के सीजफायर खत्म होने से पहले इस्लामाबाद लौटने पर विचार कर रहे हैं. अगर बातचीत बेनतीजा रही, तो पाकिस्तान को रियाद के साथ अपने डिफेंस फैक्ट को मानने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. 

इस पैक्ट को कभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है. न ही पाकिस्तान की संसद ने उसका रिव्यू किया है. इधर, ड्रॉप साइट न्यूज ने बताया कि नए पैक्ट के तहत इस्लामाबाद को साफ तौर पर सऊदी अरब की रक्षा के लिए मिलिट्री फोर्स भेजने की जिम्मेदारी दी गई है. 

क्या है पैक्ट में शामिल, और क्यों पाकिस्तान को सऊदी की बात माननी पड़ेगी? 

ड्रॉप साइट न्यूज के मुताबिक, इस पैक्ट का लेटेस्ट वर्जन 2025 में साइन किया गया. इसमें पाकिस्तान को अपनी संप्रभुता या सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे के खिलाफ सऊदी आर्म्ड फोर्सेस को सपोर्ट करने, सैन्य संपत्ति को तैनात करने और ट्रेनिंग से आगे बढ़कर ऑपरेशनल डिफेंस सपोर्ट में सहयोग बढ़ाने के लिए मजबूर करता है. इसके अलावा पाकिस्तान आग्रह के बाद सऊद अरब में अपने सेना भेजने के लिए मजबूर है. 

दोनों देशों के बीच यह साझेदारी नई नहीं है. पिछले कुछ सालों में यह काफी बदल गया था. दस्तावेजों से पता चला है कि दोनों देशों के बीच साल 1982 में पहला कॉन्फिडेंशियल डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया था. इस सैन्य कोऑपरेशन एग्रीमेंट को साल 2005 में ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स रिश्तों को शामिल करने के लिए बढ़ाया गया था. 

साल 2021 और 2024 के बीच सीधे सैन्य डिफेंस ऑब्लिगेशन में बदलाव किए. इसका नतीजा स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के रूप में सामने आया. इसपर 2025 में साइन किए गए. ड्रॉप साइट के मुताबिक, अगस्त 2021 में एग्रीमेंट में नए बदलाव से जुड़ी समरी उस समय के पीएम इमरान खान को भेजी गई. बदलाव में ऐसे क्लॉज हैं, जो असल में इस्लमाबाद को रिक्वेस्ट के बाद रियाद की फिजिकल डिफेंस में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद को बाध्य करते हैं. 

इमरान खान इस पैक्ट से क्यों डरे हुए थे?

रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रपोजल इमरान खान की डेस्क पर एक साल तक रखा रहा. सऊदी सरकार के कहने पर जिस खतरे से निपटना था, वह विदेशी था या घरेलू. पुराने अधिकारियों के हवाले ड्रॉप साइट ने बताया कि खान एक ऐसे एग्रीमेंट पर साइन करने को डरे हुए थे, जिससे पाकिस्तानी सेना को किसी विदेशी युद्ध में हिस्सा लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता था. 

खान की सत्ता हटने के बाद फरवरी 2024 में सैन्य सपोर्ट करने वाली केयरटेकर सरकार ने आखिरकार बदलावों की समरी पर साइन किए. नए अमेंडमेंट के बाद सेना के अंदर इसकी भाषा पर कथित तौर पर गरमागरम बहस हुई. एक वजह और है, जिस वजह से पाकिस्तान पर प्रेशर बना हुआ है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान की अस्थिर अर्थव्यवस्था को फाइनेंशियल मदद दी है. किंगडम के पास अभी भी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा डिपॉजिट है. जिन्हें समय पर आगे बढ़ाया जाता है. 

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