उत्तराखंंड की राजधानी देहरादून इन दिनों अपराध की एक के बाद एक दर्दनाक घटनाओं से दहल रही है. मार्च महीने में घटी तीन अलग-अलग घटनाओं ने शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. दहेज के लिए पत्नी की हत्या, छात्रावास में फावड़े से की गई हत्या और मॉर्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर को गोली – हर घटना समाज की एक अलग बीमारी को उजागर कर रही है.
घर की चारदीवारी में भी अमन नहीं – दहेज हत्याकांड
3 मार्च को नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र से एक दर्दनाक खबर आई. सरकारी लैब में काम करने वाले शहबाज ने अपनी पत्नी कहकशां की कंबल से मुंह दबाकर हत्या कर दी. शादी के बाद से घर में एक ही मांग चलती आ रही थी – पचास लाख रुपये और एक प्लॉट. कहकशां का परिवार यह मांग पूरी नहीं कर सका जिसके बाद आरोपी शहबाज ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी. पुलिस ने मुकदमा केवल पति पर ही नहीं बल्कि ससुर, सास, देवर और ननद पर भी दर्ज किया. पूरा घर आरोपी बना. यह केस उस तरह की घरेलू हिंसा की याद दिलाता है जो अक्सर चार दीवारों के भीतर दब जाती है.
फावड़े से हुई हत्या – BTech छात्र दिव्यांशु
24 मार्च को प्रेमनगर थाना क्षेत्र से एक और दिल दहला देने वाली खबर आई. मुजफ्फरनगर के रहने वाले 22 साल के BTech छात्र दिव्यांशु जाटराना की हत्या कर दी गई. बात इतनी बढ़ी कि किसी ने फावड़ा उठाया और उसके सिर पर दे मारा. पुलिस ने तीन छात्रों को पकड़ा लेकिन सात अभी भी फरार हैं. SSP देहरादून ने सातों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं. दिव्यांशु के घर मुजफ्फरनगर में उसके माता-पिता अब भी पूरे इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं.
मॉर्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर को गोली – आज की सुबह
और फिर आज 30 मार्च 2026. सुबह के करीब पौने सात बज रहे थे. जोहड़ी गांव के रहने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर वीके जोशी मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. मसूरी रोड पर मालसी के पास दिल्ली नंबर की एक फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो के बीच रास्ते को लेकर कहासुनी हुई. बात बढ़ी और गोली चल गई. गोली मॉर्निंग वॉक पर निकले ब्रिगेडियर वीके जोशी को लग गई. उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वह नहीं बचे. जिस इंसान ने देश की सीमाओं की रक्षा की वह अपने ही शहर की सड़क पर एक गाड़ी के मामले में मारा गया.
आखिर हो क्या रहा है देहरादून में
इन घटनाओं को साथ रखकर देखने पर एक बात साफ होती है कि इनमें से कोई भी एक अकेला अपवाद नहीं है. दहेज का जहर, युवाओं में बढ़ती आक्रामकता और सड़क पर रोड रेज – हर घटना समाज की एक अलग बीमारी को उजागर करती है. और सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये घटनाएं दिन के उजाले में और भीड़भाड़ वाली जगहों पर हो रही हैं जहां अपराधियों को खुद पकड़े जाने का डर तक नहीं रहा.
