Cheapest Petrol In India: भारत में कहां मिलता है सबसे सस्ता पेट्रोल, जानें क्यों है कीमत में इतना अंतर?


Cheapest Petrol In India: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से ईंधन की सप्लाई और कीमतों में उतार चढ़ाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पूरे भारत में ग्राहक पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर करीब से नजर रखे हुए हैं. काफी लोग यह नहीं जानते कि ईंधन की कीमतें एक राज्य से दूसरे राज्य में काफी अलग हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल कहां पर मिलता है और आखिर कीमतों में यह अंतर क्यों होता है.

भारत में सबसे सस्ता ईंधन 

देश में पेट्रोल की सबसे कम कीमतें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मिलती हैं. यहां पेट्रोल की कीमत लगभग ₹82.46 प्रति लीटर है. इसी के साथ डीजल की कीमत लगभग ₹78.05 प्रति लीटर हैं. इन कम कीमतों के पीछे की मुख्य वजह स्थानीय टैक्स में कमी और सप्लाई का बेहतर सिस्टम है.

कम पेट्रोल कीमतों वाले दूसरे राज्य 

दमन और दीव, दादर और नगर हवेली जैसे इलाकों में भी पेट्रोल की कीमतें काफी कम हैं. यहां लगभग ₹92-₹93 प्रति लीटर कीमत है. इसी तरह अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड भी उन राज्यों में शामिल है जहां पर ईंधन सस्ता है. वहीं हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब जैसे इलाकों में भी कीमतें काफी हद तक सामान्य रहती हैं. 

कीमतों में अंतर की सबसे बड़ी वजह 

कीमतों में अंतर का मुख्य कारण वैल्यू एडेड टैक्स है. क्योंकि पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे में नहीं आते इस वजह से हर राज्य अपने हिसाब से टैक्स लगाता है. कुछ राज्य 15% से 20% जितना कम वैल्यू एडेड टैक्स लगते हैं और कुछ राज्य 35% तक वैल्यू एडेड टैक्स लगते हैं. इस वजह से कीमतों में भारी अंतर आ जाता है. 

ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई 

ईंधन को रिफाइनरियों से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जाता है. जो राज्य रिफाइनरी से दूर हैं या फिर जहां का इलाका मुश्किल है वहां ट्रांसपोर्ट का खर्चा ज्यादा आता है. यह आखिर में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत में जुड़ जाता है.

डीलर का कमीशन 

पेट्रोल पंप डीलर बेचे गए हर लीटर पर कमीशन कमाते हैं. हालांकि यह अंतर काफी ज्यादा नहीं होता. लेकिन इसके बावजूद भी अलग-अलग राज्यों और इलाकों में कीमतों में थोड़ा बहुत अंतर होने से पंप पर मिलने वाली आखिरी कीमत पर असर पड़ सकता है.

 इन सबके अलावा कुछ राज्य अतिरिक्त शुल्क भी लगाते हैं. जैसे प्रदूषण सेस, सड़क विकास टैक्स या सामाजिक कल्याण सेस. इन अतिरिक्त शुल्क की वजह से कुछ इलाकों में ईंधन की खुदरा कीमत बढ़ जाती है.

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