पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष ने भारत के व्यापारिक तंत्र को झकझोरना शुरू कर दिया है. राजधानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों से लेकर उद्योग जगत तक चिंता गहराती जा रही है. अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो इसका सीधा असर हजारों करोड़ के कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है.
दिल्ली के बड़े व्यापारिक केंद्र जैसे चांदनी चौक, खारी बावली, भागीरथ प्लेस, कश्मीरी गेट और सदर बाजार में बेचैनी साफ नजर आ रही है. इन बाजारों का बड़ा हिस्सा दुबई के जरिए पश्चिमी एशिया और यूरोप तक निर्यात पर निर्भर है. मौजूदा हालात ने सप्लाई चेन पर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे व्यापारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
5000 करोड़ रुपये के कारोबार पर संकट की आशंका
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो दिल्ली के व्यापार और उद्योग जगत को करीब 5000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है. संगठन के अनुसार यह असर सिर्फ निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय बाजारों पर भी पड़ेगा.
भारतीय परिधान की मांग पर भी असर के संकेत
सीटीआई के पदाधिकारियों के अनुसार ईरान सहित पश्चिम एशिया के देशों में भारतीय परिधान, खासकर शेरवानी काफी लोकप्रिय हैं. लेकिन मौजूदा हालात ने इस व्यापार की गति को धीमा कर दिया है, जिससे परिधान उद्योग भी प्रभावित होने की कगार पर है.
सूखे मेवों की कीमतों में भी आया उछाल
ईरान से आने वाले पिस्ता, आलू बुखारा, किशमिश, अंजीर, खजूर और मामरा जैसे सूखे मेवों की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे न केवल व्यापारियों की लागत बढ़ी है, बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर पड़ा है.
कच्चे माल की महंगाई से दवा उद्योग पर दबाव
केमिकल कंपोनेंट, प्लास्टिक और एलुमिनियम जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने दवा कंपनियों की लागत बढ़ा दी है. टैबलेट और सिरप के निर्माण के साथ-साथ पैकेजिंग में इन सामग्रियों का व्यापक उपयोग होता है, जिससे उत्पादन महंगा हो गया है.
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जरूरी दवाओं के कच्चे माल में भारी बढ़ोतरी
हाल के दिनों में पेरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत करीब 47 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसके अलावा डाइक्लोफेनेक में 54 प्रतिशत, डाइक्लोफेनेक पोटेशियम में 33 प्रतिशत, अमॉक्सिसिलिन ट्राईहाइड्रेट में 45 प्रतिशत और सिप्रोफ्लॉक्सासिन में करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह स्थिति आने वाले समय में दवाओं की कीमतें बढ़ने का संकेत दे रही है.
एलपीजी संकट से स्ट्रीट फूड कारोबार चरमराया
एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने दिल्ली के होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट, ढाबों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स को बुरी तरह प्रभावित किया है. कई छोटे कारोबारी या तो दुकानें बंद करने को मजबूर हो गए हैं या सीमित समय के लिए ही काम कर पा रहे हैं.
50 हजार वेंडर्स में से 40% कारोबार बंद होने की कगार पर
सीटीआई के अनुसार दिल्ली में करीब 50 हजार स्ट्रीट फूड वेंडर्स हैं. इनमें से 30 से 40 प्रतिशत वेंडर्स एलपीजी की कमी के चलते अपना कारोबार बंद करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं. यह न सिर्फ व्यापार के लिए, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका के लिए भी गंभीर संकट बनता जा रहा है.
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