‘सभी तेल-गैस कंपनियों को अब अनिवार्य रूप से…’, मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा आदेश


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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से LNG (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है और भारत में नेचुरल गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ता जा रहा है. इसी को देखते हुए भारत सरकार ने इसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) की धारा 3 के तहत एक बड़ा आदेश जारी किया है.

भारत सरकार ने पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस (फर्निशिंग ऑफ इंफोर्मेशन) ऑर्डर, 2026 के तहत देश की सभी तेल और प्राकृतिक गैस कंपनियों को पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एलालिसिस सेल (Petroleum Planning & Analysis Cell) यानी PPAC को अनिवार्य रूप से अपना डेटा देने को कहा है.

सरकारी से प्राइवेट कंपनियों तक लागू होगा आदेश

इसका मतलब अब कोई भी कंपनी चाहे सरकारी हो या निजी, PPAC को डेटा देने से मना नहीं कर सकती है. कोई भी कंपनी यह कहकर नहीं बच सकती कि यह जानकारी व्यावसायिक रूप से संवेदनशील है या संपदा (Proprietary) है. सरकार को अब हर कंपनी का पूरा हिसाब-किताब मिलेगा.

इसमें कच्चे तेल के उत्पादक और आयातक, तेल रिफाइनरी, तेल मार्केटिंग कंपनियां, प्राकृतिक गैस उत्पादक, LNG आयातक, गैस पाइपलाइन ऑपरेटर, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स यानी सार्वजनिक क्षेत्र की ONGC, GAIL, IOC, BPCL, HPCL से लेकर निजी क्षेत्र की रिलायंस, अदानी गैस और हर छोटी-बड़ी कंपनी इस आदेश के दायरे में आएगी.

सरकार को देना होगा कौन-सा डेटा?

सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को उत्पादन, आयात, निर्यात, स्टॉक और भंडारण, आवंटन, परिवहन, आपूर्ति के साथ खपत और उपयोग यानी कितना तेल या गैस बनाया जा रहा, बाहर से कितना मंगाया जा रहा, कितना बाहर भेजा जा रहा, अभी कितना रखा हुआ है, किसे कितना दिया जा रहा, कहां से कहां ले जाया जा रहा, बाजार में कितना पहुंच रहा और कितना इस्तेमाल हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी सरकार को देनी होगी.

किन कारण से सरकार ने उठाया इतना बड़ा कदम?

कतर के रास लफान (Ras Laffan) पर हमले के बाद LNG की वैश्विक आपूर्ति 20 फीसदी तक प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत के तेल जहाजों की आवाजाही मुश्किल हो गई है. ऐसे में सरकार को यह जानना जरूरी है कि देश में तेल और गैस का असली स्टॉक कितना है? कहां कमी है और कहां राशनिंग करनी पड़ सकती है. PPAC को रियल टाइम डेटा मिलेगा, तो सरकार समय रहते फैसले ले सकेगी. यानि अगर आने वाले हफ्तों में गैस की किल्लत बढ़ी, तो सरकार के पास पूरा डेटा होगा कि कहां पहले राहत पहुंचानी है और कहां सप्लाई नियंत्रित करनी है.

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