अमेरिका के पूर्व अधिकारी जो केंट ने अपने इस्तीफे के एक दिन बाद मिडिल ईस्ट जंग को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को बढ़ाने में इजरायल की भूमिका रही और ईरान उस समय परमाणु हथियार बनाने के करीब नहीं था. जो केंट, जो National Counterterrorism Center के डायरेक्टर रह चुके हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल ने ऐसे कदम उठाए, जिससे हालात बिगड़े और ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई होना तय थी. उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल को भरोसा था कि अमेरिका को अंत में साथ देना ही पड़ेगा.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बोलते हुए केंट ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि ईरान कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार बना सकता है. केंट ने साफ कहा कि ऐसा कोई खतरा नहीं था. उन्होंने यह भी बताया कि 2004 से ईरान में एक धार्मिक आदेश (फतवा) लागू है, जिसमें परमाणु हथियार बनाने पर रोक है. उनके अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था कि ईरान इस आदेश का उल्लंघन कर रहा है.
🚨🇺🇸 BREAKING: Joe Kent on Why He Believes Iran Was Not an ‘Imminent Threat’
“The Israelis drove the decision to take this action, which we knew would set off a series of events because the Iranians would retaliate.”pic.twitter.com/rtgpnhDtnJ
— Jackson Hinkle 🇺🇸 (@jacksonhinklle) March 18, 2026
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई पर बयान
केंट ने यह भी कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत से अमेरिका को फायदा नहीं हुआ, बल्कि इससे ईरान के सख्त रुख वाले लोगों को और ताकत मिली. वहीं, व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को खारिज किया है. ट्रंप प्रशासन की तरफ से कहा गया कि राष्ट्रपति अपने फैसले खुद लेते हैं और किसी दूसरे देश के दबाव में काम नहीं करते. यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में युद्ध तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भर में इसके असर को लेकर चिंता बनी हुई है.
