ज्ञान से निर्वाण तक भारत के 8 प्रसिद्ध बौद्ध मठों, जानिए इनके पीछे का इतिहास!


बिहार के गया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक विशाल प्रतीक है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है, जहां करीब 2500 साल पहले सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान प्राप्त किया और बुद्ध कहलाए. बोधगया में स्थित यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल दुनिया भर के बौद्धों के लिए सबसे अहम तीर्थ स्थलों में से एक है.

बिहार के गया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक विशाल प्रतीक है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है, जहां करीब 2500 साल पहले सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान प्राप्त किया और बुद्ध कहलाए. बोधगया में स्थित यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल दुनिया भर के बौद्धों के लिए सबसे अहम तीर्थ स्थलों में से एक है.

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि, यह वही स्थान है जहां बुद्ध ने 482 ईसा पूर्व में महापरिनिर्वाण अंतिम मुक्ति प्राप्त की थी.  इस मंदिर की सबसे खास बात बुद्ध की 20 फुट लंबी विशाल लेटी हुई मूर्ति, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से उनकी मुक्ति का प्रतीक है. मंदिर के चारों तरफ स्तूप और मठ हैं, जिनमें रामभर स्तूप भी शामिल है, जिसे बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल भी माना जाता है.

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में स्थित महापरिनिर्वाण मंदिर बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि, यह वही स्थान है जहां बुद्ध ने 482 ईसा पूर्व में महापरिनिर्वाण अंतिम मुक्ति प्राप्त की थी. इस मंदिर की सबसे खास बात बुद्ध की 20 फुट लंबी विशाल लेटी हुई मूर्ति, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से उनकी मुक्ति का प्रतीक है. मंदिर के चारों तरफ स्तूप और मठ हैं, जिनमें रामभर स्तूप भी शामिल है, जिसे बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल भी माना जाता है.

Published at : 16 Mar 2026 06:20 PM (IST)

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