ईरान के नए सुप्रीम लीडर जख्मी! जंग के पहले दिन मुज्तबा खामेनेई के साथ हुआ था हादसा, चौंकाने वाला खुलासा


ईरान-अमेरिका-इजरायल जंग के बीच बड़ा खुलासा हुआ है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई जंग के पहले दिन यानी 28 फरवरी 2026 को ही घायल हो गए थे. उनके पैरों में चोट लगी है, लेकिन चोट की पूरी डिटेल्स और गंभीरता अभी साफ नहीं है. ईरानी और इजरायली अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है.

हाई-सिक्योर जगह छिपे हुए घायल मुज्तबा

NYT रिपोर्ट के मुताबिक, जंग शुरू होने के साथ ही US-इजरायल ने तेहरान में सुप्रीम लीडर के कंपाउंड पर एयरस्ट्राइक की थी. इसमें मुज्तबा के पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. उसी हमले में उनकी मां, पत्नी, एक बेटा और कई टॉप डिफेंस अधिकारी भी मारे गए. मुज्तबा खामेनेई भी उसी हमले में घायल हुए, लेकिन वो जिंदा बचे और अब एक हाई-सिक्योर जगह पर छिपे हुए हैं, जहां कम्युनिकेशन बहुत लिमिटेड है.

तीन ईरानी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दो दिनों में उन्हें ऊपरी स्तर से जानकारी मिली कि मोजतबा के पैर घायल हैं, लेकिन वो होश में हैं. इजरायली मिलिट्री के दो अधिकारियों ने भी कन्फर्म किया कि इंटेलिजेंस से पता चला है कि 28 फरवरी को मोजतबा के पैरों में चोट लगी थी. ये जानकारी उन्हें नए लीडर चुने जाने से पहले ही मिल गई थी.

ईरानी मीडिया ने मुज्तबा को बताया ‘जंगबाज’

मुज्तबा खामेनेई को उनके पिता की मौत के बाद यानी 8 मार्च को सुप्रीम लीडर चुना गया. लेकिन तब से वो न वीडियो में दिखे, न पब्लिक में आए और न कोई लिखित बयान दिया. ईरानी स्टेट टीवी और न्यूज एजेंसी IRNA ने उन्हें ‘घायल जंग का वेटरन’ कहा है. एक सरकारी चैरिटी कमिटी इमदाद ने भी उन्हें ‘जंगबाज जंग’ कहकर बधाई दी.

तेहरान में मुज्तबा की तस्वीरों वाले बड़े बैनर और म्यूरल लगे

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई से जब पूछा गया कि क्या मुज्तबा अब कमांडर-इन-चीफ की भूमिका निभा रहे हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया. बस इतना कहा, ‘जिन्हें मैसेज मिलना था, उन्हें मिल गया है.’ मुज्तबा खामेनेई लंबे समय से IRGC के साथ गहरे रिश्ते रखते हैं. वो अपने पिता के ऑफिस में सिक्योरिटी और मिलिट्री अफेयर्स कोऑर्डिनेट करते थे, लेकिन उनकी पर्सनैलिटी और प्लान्स के बारे में बहुत कम जानकारी है. वो पब्लिक में कभी-कभार ही दिखते थे. अब तेहरान में उनकी तस्वीरों वाले बड़े बैनर और म्यूरल लग गए हैं, जहां उनके पिता उन्हें ईरान का झंडा सौंपते दिखाए गए हैं.



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