पाकिस्तान ने चुपचाप यह मान लिया है कि वह अफगानिस्तान में भारतीय मिशन को निशाना बना रहा था और रमजान के दौरान उसके हवाई हमलों का ज्यादातर महिलाओं और बच्चों पर असर पड़ा है. कूटनीतिक समझदारी दिखाते हुए, सोमवार को UN सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्य हरीश पर्वतनेनी ने अफगानिस्तान पर एयर अटैक या क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को मानवता के खिलाफ बताते हुए पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. लेकिन पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद यह मानकर उनके जाल में फंस गए कि ये बातें उनके देश के बारे में थीं.
पाकिस्तान ने एयर अटैक की जिम्मेदारी ली
इफ्तिखार अहमद ने यह माना कि भारत के खिलाफ क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म और अफगानिस्तान पर एयर अटैक में इस्लामाबाद का हाथ था, जिसमें ज्यादातर औरतें और बच्चे मारे गए थे. उन्होंने यह भी माना कि अफगानिस्तान को भारत की मदद खत्म हो गई है, जब उन्होंने कहा कि भारत को अपने भारी निवेश को ‘पाकिस्तान की सटीक और असरदार कार्रवाई की वजह से’ बर्बाद होते देखकर दुख हो रहा है.
हालांकि जिस तरह बात कही गई उससे यह साफ था कि हरीश किसकी बात कर रहे थे, लेकिन आम कूटनीतिक प्रैक्टिस में, देश उन बुराईयों का जवाब नहीं देते जिनमें उनका नाम नहीं लिया जाता, क्योंकि ऐसा करना यह मानना होगा कि उन पर आरोप लगाया जा रहा है. बुराई में किसी देश का नाम न लेने से उन्हें बाहर निकलने का मौका मिल जाता है और पाकिस्तान ने इसे न लेने का फैसला किया.
हरीश ने आखिर में अहमद से कहा, ‘पाकिस्तान को आईने में देखकर अपनी दिक्कतों को देखना चाहिए, न कि मेरे देश को उन दिक्कतों के लिए दोषी ठहराना चाहिए जिनका वह सामना कर रहा है.’
पाकिस्तान ने रमजान के महीने में बेरहमी से एयर स्ट्राइक की
अहमद के लंबे बयान का छोटा सा जवाब देते हुए, हरीश ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ‘काउंसिल की हर मीटिंग में बार-बार बातें दोहराई जाती हैं और इस सम्मानित संस्था का समय बर्बाद होता है, यह सबको पता है.’ काउंसिल में अपने भाषण के दौरान, हरीश ने कहा था, ‘एक तरफ इंटरनेशनल कानून और इस्लामी एकता के ऊंचे सिद्धांतों की बात करना और दूसरी तरफ रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से एयर स्ट्राइक करना पाखंड लगता है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘6 मार्च 2026 तक इन लोगों ने 185 बेगुनाह आम लोगों को मार डाला है, जिनमें से लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे हैं.’
हरीश ने आतंकवाद के खिलाफ इंटरनेशनल कार्रवाई की भी मांग करते हुए कहा, ‘आतंकवाद एक ग्लोबल मुसीबत है जो इंसानियत को परेशान कर रही है और सिर्फ इंटरनेशनल कम्युनिटी की मिलकर की गई कोशिशों से ही यह पक्का होगा कि इस्लामिक स्टेट, अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, LeT के प्रॉक्सी जैसे द रेजिस्टेंस फ्रंट समेत जो लोग उनके ऑपरेशन में मदद करते हैं, वे अब क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद में शामिल न हों.’
अफगानी दोस्तों के लिए भारत की मदद
हरीश ने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में, भारत ने अफगानिस्तान को 50,000 टन से ज्यादा गेहूं, 380 टन दवाइयां-वैक्सीन और 40,000 लीटर पेस्टिसाइड भेजे हैं. उन्होंने कहा कि 2023 से लगभग 3,000 में से 1,000 महिलाएं को स्कॉलरशिप मिली है, जबकि भारत महिलाओं के नेतृत्व वाले सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स को फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक सपोर्ट देना जारी रखे हुए है.
हरीश ने अपने जवाब में कहा, ‘भारत की मदद अफगानिस्तान के दोस्ताना लोगों के लिए है. हमने अफगानिस्तान में जो किया है, वह अफगानिस्तान के लोगों और इंटरनेशनल कम्युनिटी को पता है.’
