ईरान के हमलों से घबराया सऊदी, रियाद पहुंचे आसिम मुनीर, क्या जंग में शामिल होगा पाकिस्तान?


अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले जारी हैं. अपनी जवाबी कार्रवाई में तेहरान उन गल्फ देशों पर हमले कर रहा है, जहां-जहां अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं. हालांकि इन हमलों में दुबई के एक होटल को निशाना बनाया गया और ताजा मामला सऊदी अरब का है, जहां ऑयल फील्ड को भी टारगेट किया जा रहा है.

इसी बीच सऊदी के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से रियाद में मुलाकात की. उनके बयान को एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि क्या अब पाकिस्तान भी ईरान की जंग में शामिल होगा. इस दौरान दोनों देशों के बीच हुए सैन्य समझौते के तहत ईरान के हमलों को रोकने के उपायों पर चर्चा हुई.

क्या बोले सऊदी के रक्षा मंत्री?
सऊदी के रक्षा मंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात हुई. हमने किंगडम पर ईरान के हमलों और उन्हें रोकने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा की. यह चर्चा हमारे संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत की गई. हमने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती हैं.

ईरान ने अब सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने 6 ड्रोन मार गिराए, जिनका टारगेट शायबा ऑयल फील्ड था. यह तेल क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित एक विशाल तेल क्षेत्र है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 4 अलग-अलग हमलों में 16 ड्रोन दागे गए. इन ड्रोन को रेगिस्तान में मार गिराया गया. 

2019 में भी हुआ था हमला
बता दें कि ये पहली बार है जब सऊदी अरब के ऑयल फील्ड को सीधे निशाना बनाया गया है. इससे पहले 2019 में भी इसी तेल क्षेत्र पर हमला हुआ था लेकिन तब यह हमला यमन में मौजूद ईरानी समर्थित हूती विद्रोहियों ने किया था. अब ईरान खुद सीधे हमले कर रहा है, जिससे खतरा और ज्यादा बढ़ गया है. हालांकि ऑयल फील्ड की तरफ मार गिराया गया ड्रोन कहां से आया था, इस बारे में रक्षा मंत्रालय ने अभी नहीं बताया है.

पाकिस्तान ने क्या कहा
पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि वो सऊदी के साथ अपने रक्षा समझौते को गंभीरता से ले रहा है. पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में एक खुलासा भी किया. उन्होंने कहा कि ईरान ने हाल ही में सऊदी अरब पर जो हमले नहीं किए, या बहुत कम प्रतिक्रिया दी, उसके पीछे पाकिस्तान की कूटनीति काम कर रही है.

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