भारत ने तेहरान की अपील पर एक ईरानी युद्धपोत को दक्षिणी बंदरगाह कोच्चि पर लंगर डालने की अनुमति दे दी है और पोत के 183 सदस्यीय चालक दल को नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है. सरकारी अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि यह घटना श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा एक ईरानी फ्रिगेट को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबोए जाने के 2 दिन बाद हुई है.
IRIS Lavan वॉरशिप पिछले महीने भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए इस क्षेत्र में आया था. यह बुधवार को कोच्चि में पहुंचा, उसी दिन श्रीलंका के तट से लगभग 19 समुद्री मील दूर फ्रिगेट आईरिस डेना डूब गया, जिसमें 87 नाविक मारे गए.
श्रीलंकाई अधिकारियों ने गुरुवार को एक और ईरानी युद्धपोत आईरिस बूशहर को देश में शरण लेने की अनुमति दी और उसके 208 सदस्यीय चालक दल को नौसैनिक शिविर में ठहराया. आईरिस बूशहर ने भी भारत के अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भाग लिया था और इंजन में खराबी आने के बाद श्रीलंकाई बंदरगाह में प्रवेश करने की अनुमति मांगी थी.
IRIS Lavan को भारत ने दी शऱण
एक अधिकारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा के लिए क्षेत्र में मौजूद आईरिस लावन को 28 फरवरी को ईरान ने भारत में शरण देने के लिए संपर्क किया था. उन्होंने आगे कहा, ‘1 मार्च को बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति दी गई और आईरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि में पहुंचा.’ अधिकारियों ने बताया कि ईरानी पक्ष के अनुरोध में कहा गया था कि कोच्चि में जहाज़ को उतारना बहुत आवश्यक है क्योंकि आईआरआईएस लावन में तकनीकी समस्याएं आ गई हैं. उन्होंने बताया कि युद्धपोत के 183 चालक दल के सदस्यों को कोच्चि स्थित नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है.
IRIS Dena के डूबने से भारत, श्रीलंका और अन्य हिंद महासागर के देशों में ईरान-अमेरिका संघर्ष के बढ़ते दायरे और क्षेत्रीय जलक्षेत्र में समुद्री व्यापार पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं. मामले से परिचित लोगों ने इस संकट से निपटने के भारतीय सरकार के तरीके को व्यावहारिक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बताया है.
ये भी पढ़ें
लोकसभा में सोमवार को लाया जाएगा ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव, BJP-कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
