मिडिल ईस्ट में इरान-इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच फुटबॉल मैदान पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है. ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने एशियाई टूर्नामेंट के मैच से पहले अपने राष्ट्रगान के दौरान खास अंदाज में सैन्य सलामी दी. यह दृश्य उस समय चर्चा में आ गया जब कुछ दिन पहले टीम ने अपने पहले मैच में राष्ट्रगान के दौरान चुप्पी साध ली थी.
यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की महिला फुटबॉल टीम के खिलाफ खेला गया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने 4-0 से जीत दर्ज की. मैच ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुआ और इसमें करीब 22 हजार दर्शक मौजूद थे.
पहले मैच में चुप्पी, दूसरे में दी सलामी
ईरान की टीम ने टूर्नामेंट के पहले मैच में राष्ट्रगान के दौरान कुछ नहीं गाया था. उस समय कई रिपोर्टों में इसे विरोध या शोक का संकेत बताया गया था, लेकिन टीम की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया. हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे मैच में खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाया और अपनी सेना को सलामी भी दी. माना जा रहा है कि यह बदलाव उस समय आया है जब मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय खबरें लगातार सुर्खियों में हैं.
खिलाड़ियों को परिवार की चिंता
मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान की स्ट्राइकर सारा दिदार भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में टीम के खिलाड़ियों और स्टाफ को अपने परिवारों और रिश्तेदारों की काफी चिंता है. 21 साल की सारा दिदार ने कहा कि खिलाड़ी मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन घर से दूर होने के कारण सभी के मन में डर और चिंता बनी हुई है.
कोच ने क्या कहा?
टीम की मुख्य कोच मरजिये जाफरी ने कहा कि मौजूदा हालात पर ज्यादा टिप्पणी करना सही नहीं होगा. उनके मुताबिक खिलाड़ियों को फिलहाल पूरी तरह से टूर्नामेंट पर ध्यान देना चाहिए और अगले साल होने वाले महिला विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने की कोशिश करनी चाहिए.
अगले मैच में जीत जरूरी
मैच की बात करे तो ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद अब ईरान की टीम के सामने बड़ी चुनौती है. अगर टीम को नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीद बनाए रखनी है तो उसे अपने आखिरी ग्रुप मैच में फिलीपींस के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज करनी होगी.
स्टेडियम के बाहर भी दिखा विरोध
मैच के दौरान स्टेडियम के बाहर कुछ प्रदर्शनकारी भी जुटे, जिन्होंने ईरान की सरकार के खिलाफ नारे लगाए. वहीं कई ईरानी मूल के लोग स्टेडियम के अंदर टीम का समर्थन करने पहुंचे. स्थानीय निवासी नसरीन वजीरी ने कहा कि खिलाड़ियों पर काफी दबाव है, लेकिन इसके बावजूद वे देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. उनके मुताबिक, “ये खिलाड़ी बेहद साहसी हैं और हमें उन पर गर्व है.”
