बिहार में हो रहे राज्यसभा नामांकन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है. माना जा रहा है कि अब लगभग यह तय हो गया है कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन कर सकते हैं और ऐसे में वह बिहार की सत्ता की कमान छोड़ सकते हैं.
इस संभावित फैसले की चर्चा जैसे ही उनके पैतृक गांव कल्याण बिगहा तक पहुंची तो यहां के ग्रामीणों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने हमेशा नीतीश कुमार को अपना नेता मानकर समर्थन दिया है और विधानसभा चुनाव में भी उनके चेहरे पर ही वोट दिया था.
2030 तक नीतीश सरकार के लिए किया था वोट
गांव के लोगों का कहना है कि चुनाव के समय यह नारा दिया गया था कि 25 से 30 फिर से नीतीश कुमार और इसी भरोसे पर उन्होंने वोट दिया था, लेकिन अब अगर वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाते हैं तो यह जनता के भरोसे के साथ धोखा होगा.
बीजेपी का साथ देने को तैयार नहीं ग्रामीण
कल्याण बिगहा के कई ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा चले जाते हैं तो वे लोग BJP का साथ नहीं देंगे. ग्रामीणों का आरोप है कि बीजेपी ने ही नीतीश कुमार के साथ राजनीतिक खेल खेला है.
उनका कहना है कि बीच रास्ते में ही नीतीश कुमार को कमजोर करने की कोशिश की गई है जिससे आम समर्थकों में नाराजगी बढ़ी है.
तेजस्वी यादव की सरकार बनाने को तैयार नीतीश के समर्थक
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनती है तो वे लोग बीजेपी को वोट नहीं देंगे और जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय जनता दल का दामन थामकर आरजेडी की सरकार बनाने में सहयोग करेंगे. उनका कहना है कि नीतीश कुमार के नाम पर ही वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों ने समर्थन दिया है. इसलिए अचानक उनका राज्यसभा जाना लोगों को स्वीकार नहीं होगा, लेकिन अटकलों के बीच मुख्यमंत्री के पैतृक गांव में बढ़ती नाराजगी ने इस मुद्दे को और भी संवेदनशील बना दिया.
