यूएस-इजरायल के ईरान पर हुए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई. तेहरान में हुए हमले की खबर के बाद शनिवार (28 फरवरी) को पुराने शहर हैदराबाद के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भड़क उठे. तनजीम-ए-जाफरी समेत शिया समुदाय के पुरुष और महिलाएं बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे. उन्होंने खामेनेई की तस्वीरें हाथों में उठाईं और अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले की कड़ी निंदा की.
खामेनेई की मौत के बाद प्रदर्शन
जब दोपहर में चारमीनार के पास मौजूद सैकड़ों लोग शांतिपूर्वक नारे लगा रहे थे. पुलिस भारी ताकत के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए है और अभी तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. प्रदर्शनकारी कह रहे थे कि खामेनेई शिया मुसलमानों के सर्वोच्च नेता थे. उनकी हत्या करके उम्मीद कैसे की जा सकती है कि ईरान चुप बैठ जाएगा?
क्या बोले प्रदर्शनकारी?
एक युवा प्रदर्शनकारी ने बताया, ‘यह रमजान के पवित्र महीने में अमानवीय और अनैतिक हमला है. जेनेवा में बातचीत सफलता के करीब थी, लेकिन अमेरिका ने रोककर हमला कर दिया.’ समुदाय ने भारत सरकार से भी अपील की कि वह इस गैरकानूनी मौत की निंदा करे. यह प्रदर्शन 28 फरवरी को हुए हमले की पृष्ठभूमि में निकले.
खामेनेई की मौत के बाद ईरान के जवाबी हमले
ईरान ने पुष्टि की कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई शहीद हो गए. ईरान ने तुरंत जवाबी मिसाइल हमले शुरू कर दिए. पुराने शहर के लोग कह रहे हैं कि भारत को दोनों तरफ संतुलन बनाए रखना चाहिए. विश्वगुरु बनने का सपना तभी पूरा होगा, जब लाखों भारतीयों की रोटी-रोटी और देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहेगी. अभी सबकी नजर है कि सरकार अगला कदम क्या उठाती है.
लखनऊ-कश्मीर में भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन
कश्मीर और लखनऊ में भी इसी तरह के शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए. शिया समुदाय ने तीन दिन का शोक घोषित किया है. भारत सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरतने की अपील की है. MEA ने कहा है कि स्थिति पर नजर है.
