होर्मुज से धड़ाधर पाकिस्तान लेकर आ रहा तेल टैंकर, क्यों इस्लामाबाद पर इतना मेहरबान हुआ ईरान?


मिडिल ईस्ट में फिर से जंग जैसे हालात और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बनी अस्थिरता की वजह से दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल और गैस की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. ईरान के पड़ोसी पाकिस्तान में इस समय तेल और गैस की भारी कमी हो गई है. यही कारण है कि कतर से गैस से भरा एक कार्गो शिप पाकिस्तान पहुंच रहा है.  ईरान और पाकिस्तान के बीच हुए एक समझौते के तहत हाल ही में एक कार्गो शिप पाकिस्तान पहुंचा था. अब फिर से विशेष इंतजाम के तहत कतर का दूसरा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से होकर पाकिस्तान जा रहा है.

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने की दी इजाजत

लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के शिपिंग डेटा के मुताबिक 1,74,000 क्यूबिक मीटर क्षमता वाला टैंकर ‘मिहजेम’ रास लफान पोर्ट से रवाना होकर पाकिस्तान के कासिम पोर्ट की ओर बढ़ रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक  मंगलवार (12 मई 2026) को यह टैंकर कराची पहुंच जाएगा. इससे पहले शनिवार (9 मई 2026) को ईरान ने पाकिस्तान के LNG टैंकर अल खरैतियात को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी थी. यह शिप रविवार (10 मई 2026) को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया.

क्यों इस्लामाबाद पर इतना मेहरबान हुआ ईरान?

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कतर सरकार के साथ हुए समझौते के तहत पाकिस्तान को LNG बेची जा रही है. ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी शांति को लेकर पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में है. कतर और पाकिस्तान के बीच भरोसे को मजबूत करने के लिए ईरान ने इस खेप को मंजूरी दी थी. सूत्रों के अनुसार, कतर से लदे दो और टैंकर आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए रवाना होने की उम्मीद है. 

एक अन्य सूत्र ने 9 मई को रॉयटर्स को बताया कि पाकिस्तान, ईरान के साथ सीमित संख्या में एलएनजी टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देने के लिए बातचीत कर रहा है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान को तुरंत गैस की जरूरत है. कतर पाकिस्तान का मुख्य एलएनजी आपूर्तिकर्ता है. कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है और उसकी सप्लाई एशियाई देशों, ज्यादातर भारत और चीन को जाती है.

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