Galwan Valley Clash: मदर्स डे से पहले चीन में एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने 2020 की गलवान घाटी झड़प की याद फिर ताजा कर दी। गलवान संघर्ष में मारे गए चीनी सैनिक चेन शियांगरोंग, शियाओ सियुआन और वांग झूरान की माताएं बीजिंग के मिलिट्री म्यूजियम पहुंचीं। वहां उन्होंने अपने बेटों की प्रतिमाओं को प्यार से छुआ और उन्हें याद करते हुए अपनी भावनाएं लिखीं। यह तस्वीरें और वीडियो अब चीन के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
2020 में गलवान घाटी में हुई थी खूनी झड़प
भारत और चीन के सैनिकों के बीच 15 और 16 जून 2020 की रात पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी. यह घटना दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने वाली सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जाती है. भारत की ओर से बताया गया था कि इस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए थे. वहीं चीन ने शुरुआती दौर में अपने किसी भी सैनिक की मौत से इनकार किया था.
चीनी सैनिकों की मौत आज भी बनी हुई है रहस्य
घटना के बाद कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में चीनी सैनिकों की मौत का दावा किया गया. अलग-अलग रिपोर्टों में यह संख्या चार से लेकर 40 तक बताई गई, लेकिन चीन ने आधिकारिक रूप से लंबे समय तक कोई जानकारी साझा नहीं की. ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने फरवरी 2021 में पहली बार स्वीकार किया था कि गलवान झड़प में उसके चार सैनिक मारे गए थे. हालांकि बाद में कुछ रिपोर्टों में 40 चीनी सैनिकों के मारे जाने का दावा भी किया गया. एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने दावा किया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के 38 सैनिक गलवान संघर्ष में मारे गए थे. इसके बावजूद आज तक चीन की ओर से स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है.
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मौतों पर चुप्पी चीन की पुरानी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि अपने सैनिकों की मौत को लेकर चुप्पी साधना चीन की पुरानी नीति रही है. 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1967 में सिक्किम के नाथू ला संघर्ष के दौरान भी चीन ने इसी तरह सीमित आंकड़े जारी किए थे. नाथू ला में पीएलए के करीब 400 सैनिकों के मारे जाने की बात कही गई थी, लेकिन चीन ने केवल कुछ मौतों को ही स्वीकार किया था. गलवान मामले में भी चीन के रवैये को उसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
गलवान संघर्ष के बाद सीमा पर बढ़ी सैन्य गतिविधियां
15 जून 2020 की गलवान झड़प पिछले पांच दशकों में एलएसी पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच पहली घातक भिड़ंत थी. इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में काफी तनाव आ गया. गलवान संघर्ष के बाद भारत ने चीन के साथ करीब 3500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य बुनियादी ढांचे, निगरानी व्यवस्था और युद्ध क्षमता को काफी मजबूत किया है. दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन सीमा पर तनाव अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
