- अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से देशों के बीच दूरियां सिमटीं.
- रूस, अमेरिका, चीन के पास हज़ारों किमी दूर मारक क्षमता.
- ब्रिटेन, फ्रांस, उत्तर कोरिया भी लंबी दूरी की मिसाइल रखते हैं.
- भारत की अग्नि-5 मिसाइल एशिया व यूरोप को लक्षित करती है.
हथियारों की होड़ में अब फासले सिमट चुके हैं. दुनिया के कुछ मुट्ठी भर देशों ने ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित कर ली है, जो महाद्वीपों की दूरियों को चंद मिनटों में तय कर सकती हैं. इन्हें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) कहा जाता है. ये मिसाइलें न केवल हजारों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को खाक कर सकती हैं, बल्कि आधुनिक डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में भी माहिर हैं. परमाणु क्षमता से लैस ये मिसाइलें आज वैश्विक राजनीति और सैन्य संतुलन का सबसे बड़ा आधार बन चुकी हैं.
रूस की डूम्सडे मिसाइल
रूस इस समय मिसाइल तकनीक के मामले में दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है. रूस के पास आरएस-28 सरमत है, जिसे ‘डूम्सडे मिसाइल’ यानी कयामत लाने वाली मिसाइल कहा जाता है. इसकी मारक क्षमता अविश्वसनीय रूप से 18,000 किलोमीटर है, जिसका मतलब है कि यह पृथ्वी के किसी भी कोने को निशाना बना सकती है. इसके अलावा, रूस के पास ‘बुरेवेस्टनिक’ नाम की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली क्रूज मिसाइल भी है, जिसकी रेंज असीमित मानी जाती है. रूस की आरएस-24 यार्स मिसाइल भी 11,000 किलोमीटर की दूरी तक तबाही मचाने में सक्षम है.
अमेरिकी न्यूक्लियर ट्रायड और मिनटमैन की रफ्तार
अमेरिका की सामरिक ताकत का सबसे बड़ा स्तंभ उसकी ‘मिनटमैन III’ बैलिस्टिक मिसाइल है. यह मिसाइल मैक 23 की अविश्वसनीय रफ्तार से चलती है और अमेरिकी परमाणु तिकड़ी (जमीन, हवा और पानी) का मुख्य हिस्सा है. इसके अलावा अमेरिका के पास ‘ट्राइडेंट II डी5’ जैसी मिसाइलें हैं जो अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने के लिए जानी जाती हैं. अमेरिका लगातार अपनी तकनीक को अपग्रेड कर रहा है, ताकि वह किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना कर सके और अपनी सैन्य सर्वोच्चता बरकरार रख सके.
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चीन की डीएफ-41 और वैश्विक पहुंच
चीन ने अपनी मिसाइल क्षमता में पिछले कुछ दशकों में अभूतपूर्व वृद्धि की है. चीन की ‘डीएफ-41’ (Dongfeng-41) मिसाइल 12,000 से 15,000 किलोमीटर की रेंज के साथ पूरी दुनिया को अपनी जद में लेती है. इसके साथ ही चीन के पास ‘जेएल-3’ जैसी सबमरीन लॉन्च्ड मिसाइलें भी हैं, जिनकी रेंज 10,000 से 12,000 किलोमीटर के बीच है. चीन की ये मिसाइलें मल्टीपल वारहेड (MIRVs) ले जाने में सक्षम हैं, जिससे एक ही मिसाइल एक साथ कई शहरों या ठिकानों को तबाह कर सकती है.
ब्रिटेन और फ्रांस की समुद्री ताकत
ब्रिटेन और फ्रांस भी उन चुनिंदा देशों में शामिल हैं, जिनके पास वैश्विक मारक क्षमता है. ब्रिटेन अपनी परमाणु पनडुब्बियों पर ‘ट्राइडेंट II’ मिसाइलें तैनात रखता है, जिनकी रेंज 12,000 किलोमीटर है. पनडुब्बी पर तैनात होने के कारण इनकी पहुंच पूरी दुनिया में कहीं भी हो सकती है. वहीं, फ्रांस के पास ‘एम-51’ (M51) मिसाइल है जिसे पनडुब्बी से लॉन्च किया जाता है. 10,000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज वाली यह मिसाइल फ्रांस को दुनिया के किसी भी हिस्से में सैन्य दखल देने की ताकत प्रदान करती है.
उत्तर कोरिया का बढ़ता खतरा और ह्वासोंग मिसाइल
उत्तर कोरिया ने हाल के वर्षों में अपनी मिसाइल तकनीक से दुनिया को चौंका दिया है. उत्तर कोरिया की ‘ह्वासोंग-15’ बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज 13,000 किलोमीटर है, जो अमेरिका के मुख्य भूभाग को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त है. हालांकि उत्तर कोरिया के पास परमाणु संचालित पनडुब्बियां नहीं हैं, इसलिए उसकी मिसाइल पहुंच जमीन आधारित लॉन्च पैड तक ही सीमित है. फिर भी, वह दुनिया के उन शीर्ष छह देशों में शामिल है जिनके पास लंबी दूरी की मारक क्षमता मौजूद है.
भारत की अग्नि-5 और सामरिक दबदबा
भारत दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी मिसाइल शक्ति के रूप में उभरा है. भारत की ‘अग्नि-5’ मिसाइल दुनिया की टॉप-10 ICBM श्रेणी में शामिल है. इसकी मारक क्षमता 7,000 से 8,000 किलोमीटर के बीच है, जो लगभग पूरे एशिया और यूरोप के बड़े हिस्से को कवर करती है. भारत ने विशेष रूप से अपनी सीमाओं की सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए इस रेंज को विकसित किया है. रोड-मोबाइल लॉन्च सिस्टम की वजह से इसे कहीं भी ले जाकर लॉन्च किया जा सकता है, जो भारत की जवाबी हमले की क्षमता को और भी मजबूत बनाता है.
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