दहेज के लिए पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी पति को जमानत देते वक्त हाईकोर्ट ने तथ्यों को पर गौर नहीं किया और सिर्फ इस आधार पर जमानत दे दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पिछले कुछ सालों में दहेज की वजह से शादीशुदा महिलाओं के साथ क्रूरता, हत्या और आत्महत्या जैसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि खासतौर पर ऐसे मामले उत्तर प्रदेश में देखे गए हैं. कोर्ट ने कहा कि 2023 के डेटा के अनुसार दुनियाभर में 6,156 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 2,122 उत्तर प्रदेश और 1,143 बिहार के हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हमें यह देखकर अत्यंत दुख हुआ कि हाईकोर्ट ने दहेज हत्या जैसे संगीन अपराध में आरोपी को जमानत देते वक्त तथ्यों पर गौर नहीं किया. हमारा मानना है कि कोर्ट ने अभियुक्तों के पक्ष में अपने विवेक का प्रयोग करने में घोर त्रुटि की है.’ कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिलाओं के साथ दहेज को लेकर बढ़ती क्रूरता को दर्शाता है.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रतिबंधों और शिक्षा की बढ़ती पहुंच के बावजूद दहेज के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जो बाद में अक्सर महिलाओं के साथ, क्रूरता और हिंसा में बदल जाती है. कोर्ट ने कहा, ‘हमने काफी समय में देखा है कि उत्तर प्रदेश में दहेज की वजह से नई शादीशुदा महिलाओं को ससुराल में बेरहमी से मार डाला जा रहा है. या उन्हें लगातार उत्पीड़न की वजह से सुसाइड करने पर मजबूर किया जाता है या लगातार दहेज की मांग की वजह से उनकी हत्या कर दी जाती है.’
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यह मामला साल 2024 का है, जब दहेज के लिए गाजियाबाद में एक महिला की हत्या कर दी गई थी. महिला की शादी फरवरी, 2019 में प्रिंस चौधरी नाम के शख्स से हुई थी. महिला के पिता ने एफआईआर में बताया कि उन्होंने शादी में 30 लाख रुपये खर्च किए, जिसमें एक आई20 कार और 10 लाख रुपये कैश शामिल हैं. कार एक एक्सीडेंट में डैमेज हो गई थी, जिसके बाद महिला का पति और ससुराल वाले एक फॉर्च्युनर कार और 10 लाख रुपये की डिमांड करने लगे.
शिकायत के अनुसार जब ये मांग पूरी नहीं हुईं तो ससुरालवालों ने महिला का मारना शुरू कर दिया, उसको मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया. बाद में महिला के पिता ने 10 लाख रुपये की डिमांड पूरी कर दी. उन्होंने पति के रिश्तेदार के अकाउंट में 4 लाख रुपये ट्रांसफर किए और अलग-अलग मौकों पर 5 लाख रुपये कैश भी दिया. फिर भी ससुराल वाले महिला के साथ मारपीट करते रहे.
शिकायत के अनुसार 11 जुलाई, 2024 को सुबह 7 बजे महिला ने रोते हुए पिता को फोन किया और बताया कि ससुराल में उसके साथ बहुत मारपीट हुई और उसको गला घोंटकर या फांसी लगाकर मारने की धमकी दी जा रही है. कुछ घंटे बाद महिला के घरवालों को एक रिश्तेदार ने फोन करके बताया कि उसको गला घोंटकर फांसी लगा दी गई है. जब महिला के पिता ससुराल पहुंचे तो वह वहां नहीं थी, उसको हॉस्पिटल ले जाया गया था, जहां पता चला कि वह मर चुकी है.
हादसे के अगले ही दिन शिकायत दर्ज कर दी गई, जिसमें प्रिंस सहित 8 घरवालों को आरोपी बनाया गया. जांच के बाद प्रिंस और उसके माता पिता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनयम के तहत चार्जशीट दाखिल हुई.
