Four Stars of Destiny Controversy: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद में इस किताब के एक अंश का जिक्र करने के बाद, एक नई बहस को छेड़ दिया था. विवाद इतना बढ़ा था कि संसद में राहुल गांधी को इस पर बोलने नहीं दिया गया था. इंडिया टुडे को दिए हाल ही के इंटरव्यू में नरवणे ने बताया कि इस टिप्पणी का मतलब, जिसमें कथित तौर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चीन सीमा विवाद के दौरान उनसे कही थी. उन्होंने कहा था कि जो उचित समझो वो करो.
जनरल नरवणे ने कहा कि यह टिप्पणी सशस्त्र बलों पर सरकार के ‘पूरे भरोसे’ को दिखाती है, इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. पूर्व सेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि जमीनी हालात से निपटने के लिए सशस्त्र बलों को पूरी आजादी यानी फ्री हैंड दिया गया था. नरवणे ने बताया कि यह मूल रूप से उस भरोसे को दिखाता है, जो सरकार को सेना, उसके नेतृत्व और सेवा प्रमुखों पर था. वे जानते थे कि जो भी फैसला लिया जाएगा, वह सभी बातों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा.
नरवणे ने किताब के कथन पर राजनीति करने को लेकर चेतावनी दी, साथ ही पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए् कहा कि भारत के सशस्त्र बल पूरी तरह से राजनीति से दूर रहते हैं. जैसा कि हमारे पडो़स में नहीं होता.
मामला क्या है पूरा?
पूरा विवाद संसद के बजट सत्र के दौरान तब हुआ, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अनपब्लिशड बुक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के कुछ अंश पढ़ने की कोशिश की.
स्पीकर ने उन्हें ऐसा करने से रोका. स्पीकर ने इसलिए मना किया था क्योंकि किताब पब्लिश नहीं थी. उसका सदन में जिक्र नहीं किया जा सकता है.
गांधी तब भी नहीं रुके और उस किताब की कॉपी ले आए. राहुल गांधी ने उस कथन को लेकर दावा किया था कि ‘जो उचित समझो, वो करो’ कथित तौर पर सीमा पर तनाव के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ़ से जनरल नरवणे तक यह संदेश पहुंचाया था. नरवणे ने सरकार को चीनी टैंकों को आगे बढ़ने की जानकारी दी थी.
राहुल का कहना था कि चीन की सेना भारत की सीमा में घुस रही थी और सरकार जवाब नहीं दे रही थी. यह घटना 31 अगस्त 2020 की बताई गई. राहुल का कहना था कि नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की. आर्मी चीफ ने इस किताब में कहा है कि उन्हें अकेलापन महसूस हुआ. पूरे सिस्टम ने उन्हें छोड़ दिया था.
क्या है इस किताब के अंदर ?
उस समय चीन की सेना रेचिन ला की ओर बढ़ रही थी. 2024 में पेंगुइन द्वारा इसे रिलीज किया जाना था. लेकिन इसका लॉन्च रोक दिया गया. इस किताब को अभी रक्षा मंत्रालय से मंजूर नहीं मिली है. यह किताब जनरल नरावणे के करियर का ब्योरा है, यानी Memoir है.
