- रास्तों का रखरखाव महंगा, पर देशों की कमाई का जरिया.
दुनिया की अर्थव्यवस्था केवल तेल और गैस के उत्पादन पर नहीं टिकी है, बल्कि उन रास्तों पर भी निर्भर है जहां से ये सामान गुजरता है. कुछ देश ऐसे हैं जिनकी भौगोलिक स्थिति कुदरत का करिश्मा है. वे न तो सोना उगलते हैं और न ही तेल का कुआं रखते हैं, फिर भी वे अरबों डॉलर की कमाई सिर्फ टोल वसूलकर कर रहे हैं. स्वेज और पनामा जैसी नहरें आज ग्लोबल ट्रेड की धड़कन बन चुकी हैं. आइए जानें कि आखिर कैसे ये समुद्री रास्ते देशों को मालामाल बना रहे हैं?
दुनिया का सबसे महंगा टोल टैक्स
जब हम व्यापार की बात करते हैं, तो अक्सर फैक्ट्रियों और कच्चे माल का जिक्र होता है, लेकिन असल खेल उन संकरे रास्तों का है जिन्हें ‘चोक पॉइंट्स’ कहा जाता है. दुनिया के कुछ खास समुद्री रास्ते और नहरें ऐसी जगह स्थित हैं, जहां से गुजरे बिना अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुमकिन ही नहीं है. इन रास्तों पर कब्जा रखने वाले देश जहाजों से भारी-भरकम फीस वसूलते हैं. यह कमाई इतनी ज्यादा है कि कई देशों की पूरी जीडीपी का बड़ा हिस्सा सिर्फ इसी टोल टैक्स से आता है.
मिस्र की किस्मत बदलती स्वेज नहर
स्वेज नहर को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण कृत्रिम समुद्री रास्ता माना जाता है. यह लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है, जिससे यूरोप और एशिया के बीच की दूरी हजारों किलोमीटर कम हो जाती है. मिस्र के लिए यह नहर किसी ‘सोने की खदान’ से कम नहीं है. हर साल हजारों जहाज यहां से गुजरते हैं और इसके बदले मिस्र को अरबों डॉलर का राजस्व मिलता है. 2023-24 के आंकड़ों को देखें तो मिस्र ने सिर्फ इस एक नहर से करीब 9 से 10 अरब डॉलर की कमाई की है.
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पनामा नहर का अमेरिकी महाद्वीप पर दबदबा
अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाली पनामा नहर इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है. मध्य अमेरिका का छोटा सा देश पनामा इसी नहर की वजह से दुनिया के अमीर देशों की कतार में खड़ा है. जहाजों को दक्षिण अमेरिका का पूरा चक्कर लगाने से बचाने वाली यह नहर प्रति जहाज लाखों डॉलर वसूलती है. यहां ‘लॉक सिस्टम’ के जरिए जहाजों को पहाड़ के ऊपर से ले जाया जाता है. पनामा के लिए यह नहर विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा स्रोत है और इसके बिना वैश्विक सप्लाई चेन अधूरी है.
मलक्का जलडमरूमध्य
इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच स्थित मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री रास्ता है. हालांकि यहां कोई नहर नहीं है, लेकिन सिंगापुर ने इस रास्ते का इस्तेमाल कर अपनी किस्मत बदल ली है. यहां से गुजरने वाले हर चौथे जहाज को सिंगापुर में रुकना पड़ता है. ईंधन भरने, मरम्मत और रसद की सेवाओं के जरिए सिंगापुर इस रूट से इतनी कमाई करता है कि आज वह दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग हब बन गया है. चीन की 80 फीसदी तेल सप्लाई इसी रास्ते पर निर्भर है.
होर्मुज जलडमरूमध्य की सामरिक ताकत
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ‘तेल की नली’ कहा जाता है. दुनिया का एक-तिहाई समुद्री कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. हालांकि यहां टोल वसूलने का सीधा सिस्टम नहरों जैसा नहीं है, लेकिन ईरान और ओमान इस क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी के नाम पर अपनी सामरिक शक्ति का लोहा मनवाते हैं. ओमान ने मुसंडम प्रायद्वीप के पास अपनी स्थिति का फायदा उठाकर इस क्षेत्र में बड़े लॉजिस्टिक हब विकसित किए हैं, जिससे उसे भारी राजस्व मिलता है.
बाब-अल-मंडेब का बढ़ता हुआ महत्व
लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य यमन, जिबूती और इरिट्रिया के पास है. यह स्वेज नहर का प्रवेश द्वार है. जिबूती जैसे छोटे देश ने अपनी भौगोलिक स्थिति का इतना बेहतरीन इस्तेमाल किया है कि वहां आज दुनिया की महाशक्तियों (अमेरिका, चीन, फ्रांस) के सैन्य ठिकाने हैं. इन ठिकानों के किराए और बंदरगाह सेवाओं से जिबूती की अर्थव्यवस्था चलती है. बिना किसी प्राकृतिक संसाधन के भी यह देश वैश्विक व्यापार की सुरक्षा के नाम पर भारी कमाई कर रहा है.
बोस्फोरस और डार्डानेल्स का तुर्की पर असर
तुर्की के पास स्थित बोस्फोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य काला सागर को बाकी दुनिया से जोड़ते हैं. मॉन्ट्रो कन्वेंशन के तहत तुर्की को इन रास्तों पर काफी नियंत्रण प्राप्त है. हालांकि यहां से गुजरना अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन है, लेकिन तुर्की जहाजों की सुरक्षा, स्वास्थ्य निरीक्षण और गाइडिंग सेवाओं के नाम पर अच्छी-खासी फीस वसूलता है. यूक्रेन और रूस के युद्ध के दौरान इन रास्तों की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है, जिससे तुर्की की कूटनीतिक और आर्थिक ताकत में इजाफा हुआ है.
नहरों और रास्तों की मरम्मत का भारी खर्च
टोल से होने वाली यह कमाई जितनी आकर्षक दिखती है, इन रास्तों का रखरखाव उतना ही चुनौतीपूर्ण है. स्वेज और पनामा जैसी नहरों को लगातार गहरा करना पड़ता है, ताकि आधुनिक विशाल जहाज वहां से गुजर सकें. पनामा में सूखे के कारण पानी के स्तर में गिरावट एक बड़ी समस्या बन गई है, जिससे जहाजों की संख्या कम करनी पड़ी. फिर भी, बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए इन रास्तों का महत्व कभी कम नहीं होगा और ये देश बिना कुछ बेचे भी दुनिया के ‘चौकीदार’ बनकर कमाई करते रहेंगे.
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