- विपक्ष इस घटना को लेकर सत्ता गठबंधन पर तंज कस रहा है.
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा था, यहां कई योजनाओं की घोषणाओं के साथ राष्ट्रीय लोकदल की संयुक्त रैली भी थी. लेकिन स्थिति तब विकट हो गयी जब मेरठ के सिवाल खास विधानसभा सीट से लोकदल विधायक गुलाम मोहम्मद को रैली स्थल पर प्रवेश करने से रोक दिया गया. पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि उनका नाम न मंच के लिए है और न नीचे के मंच पर. जिसके बाद विधायक वापस लौट गए.
एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय वर्मा और विधायक गुलाम मोहम्मद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल है.हालांकि, बाद में जब इस मामले की जानकारी मंच पर मौजूद स्थानीय पदाधिकारियों को हुई, तो उन्होंने विधायक गुलाम मोहम्मद को मंच पर बुला लिया और मामला शांत हुआ.
MLA ने बताया मिसअंडरस्टैंडिंग
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक गुलाम मोहम्मद ने इसे महज एक ‘मिसअंडरस्टैंडिंग’ बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि उनका नाम सूची में शामिल होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने आने की पूर्व सूचना नहीं दी थी, जिसके चलते यह स्थिति बनी.
विधायक के अनुसार, जब उन्होंने अधिकारियों से पुष्टि करने को कहा, तो उन्हें सूची दिखाई गई, जिसमें उनका नाम नहीं था. इसके बाद वे स्वयं ही वहां से लौटने लगे. उन्होंने साफ किया कि इस घटना को लेकर उनके मन में किसी प्रकार की नाराजगी नहीं है और यह केवल आपसी भ्रम की स्थिति थी.
लग रहे सियासी कयास
मुख्यमंत्री की सभा में सत्ता गठबंधन के विधायक को रोकने का मामला अब सियासी गलियारे में चर्चा में है. विपक्षी पार्टी खासकर सपा तंज कस रही है कि अपने गठबंधन के साथियों के साथ भाजपा का यह व्यवहार है. फ़िलहाल खुद विधायक के बयान के बाद ये विवाद खत्म हो जाना चाहिए था. लेकिन अब चर्चा तो होगी ही.
