ईरान और अमेरिका के बीच स्थाई शांति के उद्देश्य से इस्लमाबाद में होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए जेडी वेंस पाकिस्तान रवाना हो चुके हैं. उन्होंने ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत की उम्मीद जताने के साथ-साथ चेतावनी भी दी है. जेडी वेंस ने कहा कि इस्लामाबाद वार्ता को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं और हम सकारात्मक बातचीत करने की कोशिश करेंगे.
जेडी वेंस ने ईरान को दी चेतावनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, ‘हम बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगी, जैसा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी कहा है. अगर ईरानी लोग सद्भावना के साथ बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम निश्चित रूप से उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं. अगर वे हमारे साथ चाल चलने की कोशिश करेंगे तो उन्हें पता चल जाएगा कि हमारी बातचीत करने वाली टीम इतनी नरम नहीं है.’
इस्लामाबाद को कीले में तब्दील किया गया
अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर बुधवार को सहमत हुए, जिसके बाद मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए इस्लामाबाद में बैठक होगी. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के आगमन से पहले शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई. प्रस्तावित बैठक को लेकर इस्लामाबाद में 10,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है. सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है.
इस्लामाबाद वार्ता पर उठ रहे सवाल
सीजफायर के ऐलान के बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान रवाना होने से पहले 9 अप्रैल को जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है.
इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है. हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था. इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है. ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है.
