जयपुर: ‘ईरान-अमेरिका सीजफायर पर भारत चूक गया बड़ा मौका’, जानें शिया धर्मगुरु ने क्यों कही ये बात?


मिडिल ईस्ट में करीब 40 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद अब सीजफायर हो गया है. इस घटनाक्रम को लेकर करीब दो दशक तक ईरान में रहकर भारत लौटे चर्चित शिया धर्मगुरु का बड़ा और तीखा बयान सामने आया है, जिसने कूटनीतिक बहस को भी हवा दे दी है.

जयपुर की शिया जामा मस्जिद के इमाम और इस्लामिक स्कॉलर मौलाना सैयद नाजिश अकबर काजमी ने सीजफायर को लेकर भारत सरकार की भूमिका पर निराशा जाहिर की. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत ने इस पूरे मामले में पहल नहीं करके एक बड़ा अवसर गंवा दिया.

‘भारत को करवाना चाहिए था सीजफायर’

मौलाना काजमी के मुताबिक, अगर भारत सीजफायर के लिए आगे आता तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी साख और मजबूत होती. उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान जैसे देश इस दिशा में पहल कर सकते हैं, तो भारत के लिए यह कदम उठाना कोई मुश्किल काम नहीं था.

‘पीएम मोदी की पहचान को मिलती मजबूती’

शिया धर्म गुरु का कहना है कि दोनों पक्ष पहले से ही सीजफायर के लिए मन बना चुके थे. ऐसे में भारत अगर आगे बढ़कर मध्यस्थता करता, तो इस जंग को रोकने का पूरा श्रेय उसे मिल सकता था. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक पहचान को और मजबूती मिलती, लेकिन भारत ने इस बड़े मौके को गंवा दिया. 

‘जंग से अमेरिका को लगा झटका’

जंग के नतीजों पर बात करते हुए मौलाना नाजिश काजमी ने इसे अमेरिका के लिए बड़ा झटका बताया. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने अमेरिका के ‘गुरूर को चकनाचूर’ कर दिया और उसे सीजफायर के लिए मजबूर होना पड़ा. उनके अनुसार, यह ईरान और आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाने वालों की बड़ी जीत है.

उन्होंने यह भी कहा कि दुनियाभर में जो लोग इस सीजफायर को जश्न के तौर पर मना रहे हैं, उनका नजरिया गलत नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस जंग में बड़ी संख्या में बेगुनाह लोगों की जान गई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

‘आज खुशियां मनाने का दिन’

मौलाना सैयद नाजिश अकबर काजमी का कहना है कि अमेरिका को झुका देना और सीजफायर के लिए मजबूर कर देना किसी बड़ी जीत से कम नहीं है. यह आतंकवाद और तानाशाही के खिलाफ लड़ने वाले लोगों के लिए जश्न मनाने का बड़ा मौका है. लोगों को आज का दिन ईद की तरह सेलिब्रेट करना चाहिए और जमकर खुशियां मनानी चाहिए.  

उनके मुताबिक ईरान में तबाह हुई बिल्डिंग्स और पुल तो फिर से बन जाएंगे, लेकिन अमेरिका का जो गुरूर टूटा है और उसका सर पूरी दुनिया में जो झुक गया है, वह इज्जत उसे दोबारा हासिल होने वाली नहीं है. यह इंसानियत और इंसाफ की बड़ी जीत है और आतंकवाद व तानाशाही सोच की हार है. 

‘हमेशा के लिए खत्म होनी चाहिए जंग’

शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद नाजिश अकबर काजमी लंबे अरसे तक ईरान में रहे हैं. करीब दो दशक तक वह ईरान में रहकर धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं. उनका कहना है कि सीजफायर भले ही फिलहाल दो हफ्ते का हो, लेकिन हम सब दुआ करते हैं कि यह जंग हमेशा के लिए खत्म हो जाए क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर बेगुनाह इंसानों का खून बहा है. 

‘रमजान में बच्चियों का बहाया खून’

उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की हार इसलिए भी है, क्योंकि उसने स्कूल पर रमजान के महीने में बम गिराकर बेगुनाह बच्चियों का खून बहाया है. इससे उसकी बौखलाहट और हार का अंदाजा लगाया जा सकता है. उनका कहना है कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई की शहादत ने उनके विचारों और पैगाम को एक नया मुकाम दिया है. उन्होंने शहादत देकर अमेरिका जैसे दहशतगर्द का घमंड तोड़ दिया है और साथ ही उसे सर झुकाने पर मजबूर कर दिया. 

‘दूसरे मुल्क पर ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा अमेरिका’

मौलाना काजमी का कहना है कि 40 दिनों तक चली जंग का अंजाम अब इतिहास बन चुकी है. अमेरिका अब भूल कर भी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कभी भी किसी दूसरे मुल्क में करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा.



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