समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव दो दिनों तक राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपनी पार्टी के लिए सियासी संभावनाएं तलाशते नजर आए. अपने इस दौरे पर उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर जमकर सियासी तीर चलाए.
हालांकि, अखिलेश के ये तीर बीजेपी से ज्यादा सहयोगी दल ‘कांग्रेस’ को चुभते हुए दिखे. बीजेपी ने तो सपा प्रमुख पर कोई खास पलटवार नहीं किया, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें इशारों-इशारों में अल्टीमेटम जरूर दे दिया. इससे पहले कि कांग्रेस के साथ मामला बिगड़ता और ‘इंडिया’ गठबंधन के रिश्तों में तल्खी आती, अखिलेश यादव ने एक सधा हुआ बयान देकर कांग्रेस की सारी उलझन को खत्म कर दिया.
जयपुर में अखिलेश की सक्रियता और वसुंधरा राजे से हमदर्दी
सपा मुखिया अखिलेश यादव शुक्रवार (10 अप्रैल) को जयपुर पहुंचे थे. यहां उन्होंने कई निजी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और दूसरी पार्टियों के बड़े नेताओं से भी मुलाकात की. मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने सीएम भजनलाल शर्मा और बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला. दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से हमदर्दी जताते हुए कहा कि, “अगर वसुंधरा राजे राजस्थान की सीएम होतीं, तो यहां के हालात ज्यादा बेहतर होते.”
कांग्रेस का अल्टीमेटम: ‘हम अकेले हराने में हैं सक्षम’
राजस्थान में अखिलेश यादव की इस बढ़ती सक्रियता से कांग्रेसी खेमे में बेचैनी देखने को मिली. जब इस पर कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक और आदर्श नगर से विधायक रफीक खान से सवाल किया गया, तो उन्होंने दो टूक लहजे में जवाब दिया.
रफीक खान ने कहा, “हर किसी को अपनी पार्टी और संगठन के लिए काम करने का अधिकार है. राजस्थान में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और बीजेपी को अकेले दम पर हराने में सक्षम है. अखिलेश यादव फिलहाल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन अगर वह राजस्थान चुनाव में कांग्रेस का साथ नहीं भी देंगे, तो भी हम बीजेपी को अपने दम पर मात दे देंगे.”
अखिलेश ने खत्म की उलझन, UP चुनाव पर किया बड़ा ऐलान
कांग्रेस नेता रफीक खान के इस तल्ख बयान के बाद जब अखिलेश यादव से सवाल किया गया, तो उन्होंने बिना किसी देरी के स्थिति स्पष्ट कर दी. उन्होंने साफ किया कि फिलहाल राजस्थान में अकेले चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है.
उनका मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश है, जहां वह बीजेपी को हराना चाहते हैं. अखिलेश ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि, “यूपी में फिलहाल किसी नए बड़े दल से गठबंधन का कोई इरादा नहीं है. मौजूदा समय में कांग्रेस पार्टी के साथ जो तालमेल है, वही एलाइंस (गठबंधन) आगामी विधानसभा चुनाव में भी काम करेगा.”
बड़ा दिल या सियासी मजबूरी?
अखिलेश यादव की रवानगी से पहले ही उनके दौरे को लेकर कांग्रेसी खेमे में पैदा हुई हलचल पल भर में ठंडी हो गई. हालांकि, सियासी गलियारों में अब यह सवाल तैर रहा है कि इसे अखिलेश की दरियादिली माना जाए या फिर राजनीतिक मजबूरी?
दरअसल, 2 साल पहले हुए लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस का साथ पाकर ही यूपी में बीजेपी को सियासी पटखनी दी थी. राजस्थान विधानसभा चुनाव से डेढ़ साल पहले ही यूपी में 2027 का सियासी संग्राम होना है. ऐसे में अखिलेश यादव यूपी चुनाव से पहले अपने सबसे अहम सहयोगी (कांग्रेस) को नाराज करने का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं.
