वाराणसी की ये 2 विधानसभा सीटें अखिलेश यादव के लिए अहम क्यों? सपा का है पूरा फोकस, जानें गणित


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  • वाराणसी की उत्तरी-दक्षिणी सीटों पर सपा की खास नजर है.
  • उत्तरी सीट पर मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा उठा.
  • ज्ञानवापी, दालमंडी जैसे मुद्दे दक्षिणी सीट पर अहम होंगे.
  • दोनों सीटों पर दावेदारों की लंबी कतार देखी जा रही.

उत्तर प्रदेश की सियासत के लिए कहते हैं कि जिसने पूर्वांचल जीत लिया उसके लिए लखनऊ का सफर आसान हो जाता है. इनमें भी पूर्वांचल का सबसे बड़ा केंद्र है वाराणसी, जहां आठ विधानसभा सीट हैं. वाराणसी देश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में भी गिनी जाती है क्योंकि यह नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है. ऐसे में यहां की हर विधानसभा सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बन जाती है. सपा अगर यहां अगर खुुद को मजबूती से दिखाती है तो वह जनता को मजबूत संदेश दे सकती है कि बीजेपी से वाराणसी की जनता खुश नहीं है. इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा.

 

यही कारण है कि वाराणसी में अभी से ही उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए सियासी घमासान शुरू हो गया है. वाराणसी जनपद के शहरी क्षेत्र में चार विधानसभा सीटों की बात करें तो समाजवादी पार्टी की अभी से ही यहां कि दो विधानसभा सीटों पर खास नजर है. इन सीटों का नाम है वह वाराणसी की उत्तरी और दक्षिणी विधानसभा सीट है.  समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार वाराणसी जनपद के शहरी क्षेत्र में दक्षिणी और उत्तरी विधानसभा सीट पर पार्टी की खास नजर है.

सपा के लिए यह सीटें इतनी अहम क्यों?

दरअसल, इन दोनों सीटो पर जीत केवल उम्मीदवार नहीं, बल्कि पार्टी के ग्राउंड संगठन पर निर्भर करती है. यही कारण है कि इन दोनों सीटों पर सपा फोकस करके अपनी शहरी पकड़ मजबूत करना चाहती है. खास बात यह है कि यहां मिश्रित वोटर भी देखने को मिलते हैं, इसलिए यहां कोई एक  फैक्टर काम नहीं करता. सही उम्मीदवार और सही जातीय समीकरण से ही यहां जीत की संभावना बनती है. उत्तरी विधानसभा सीट पर वर्तमान समय में विधायक रविंद्र जायसवाल है, जो कैबिनेट में मंत्री भी हैं. जायसवाल ने 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के ही प्रत्याशी को 40,776 वोटों के अंतर से हराया था, लेकिन इस बार उत्तरी विधानसभा SIR  के दौरान सबसे ज्यादा मतदाताओं की सूची से बाहर होने की बात सामने आई है.

 

दक्षिणी विधानसभा सीट से बीजेपी के ही विधायक ने जीत हासिल की थी, लेकिन मुकाबला बेहद कांटेदार रहा था. इस बार यहां ज्ञानवापी से लेकर दालमंडी और व्यापारियों के अनेक ऐसे विषय हैं, जिसके आधार पर समाजवादी पार्टी मतदाताओं को अपने तरफ खींचने का पूरा प्रयास करेगी. हालांकि इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का दशकों से दबदबा रहा है. सपा नेता इन सीटों पर अभी से ही हर वर्ग के मतदाताओं पर खास नजर रखे हुए हैं . 

टिकट की दावेदारी को लेकर घमासान शुरू

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट के लिए जोर आजमाइश अभी से ही शुरू हो चुकी है .वहीं, इन दो विधानसभा सीटों की बात करें तो प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी से ही इन सीटों पर 8-8 उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं.  इसमें उत्तरी विधानसभा से मुस्लिम उम्मीदवार भी शामिल हैं. हालांकि, देखना यह होगा कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी किन उम्मीदवारों पर भरोसा जताती है. 

 

 



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