US VS Iran Military: अमेरिकी सेना के सामने कहां टिकता है ईरान, जानें दोनों देशों की सैन्य ताकत और चयन प्रक्रिया


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US VS Iran Military: मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब एक वैश्विक संकट बन चुका है. तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और इसी के साथ जमीनी और हवाई हमले भी तेज हो चुके हैं.‌ अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह जंग एक खतरनाक रूप ले चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अमेरिका की सैन्य शक्ति के आगे ईरान कहां टिकता है और दोनों देशों की सेनाओं की चयन प्रक्रिया क्या है.

अमेरिका और ईरान की सैन्य ताकत 

हाल की वैश्विक तुलना में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान की सैन्य शक्ति में एक बड़ा अंतर सामने आया है. ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत के तौर पर अपना दबदबा बनाए हुए है. इसी के साथ ईरान वैश्विक स्तर पर 16 वें स्थान पर है. 

वैश्विक शक्ति और बजट का अंतर 

दोनों देशों के बीच रक्षा खर्च में भारी अंतर है. अमेरिका हर साल रक्षा पर लगभग $900 अरब खर्च करता है. इससे वह रक्षा पर दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश बन जाता है.  यह फंडिंग एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड हथियार प्रणाली और वैश्विक सैन्य उपस्थिति को बढ़ावा देती है. 

दूसरी तरफ ईरान काफी छोटे बजट के साथ काम करता है. ईरान का सैन्य बजट लगभग 10 अरब डॉलर से 25 अरब डॉलर के बीच है. लेकिन ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे किफायती मगर असरदार तकनीक में निवेश करके ईरान इसकी पूरी भरपाई कर लेता है. 

क्या है दोनों देशों की भर्ती प्रक्रिया?

संयुक्त राज्य अमेरिका पूरी तरह से स्वैच्छिक मॉडल को अपनाता है. इसका मतलब है कि किसी भी नागरिक के लिए सेना में सेवा करना अनिवार्य नहीं है. जो लोग सेना में शामिल होना चाहते हैं उन्हें ASVAB जैसे कड़े परीक्षणों के साथ कठोर शारीरिक और चिकित्सा जांचों से गुजरना पड़ता है. इसका नतीजा यह होता है कि एक काफी ज्यादा प्रशिक्षित और पेशेवर सेना तैयार होती है.

वहीं ईरान में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू है.18 वर्ष से ज्यादा आयु के लगभग हर पुरुष को 18 से 24 महीने तक सेना में सेवा करनी पड़ती है. इसकी सैन्य संरचना दो मुख्य बलों में बांटी गई है. पारंपरिक सेना और एक खास वैचारिक इकाई जो सीधे लीडरशिप को रिपोर्ट करती है. इनके अलावा एक विशाल स्वैच्छिक अर्धसैनिक बल भी है जिसे संकट के समय सक्रिय किया जा सकता है. 

हवाई और नौसैनिक ताकत 

जब हवाई शक्ति की बात आती है तो संयुक्त राज्य अमेरिका का कोई मुकाबला नहीं है. ग्लोबल फायरपावर के डेटा के मुताबिक 13000 से ज्यादा विमानों के साथ यह दुनिया के आसमान पर अपना दबदबा बनाए हुए है. इसकी नौसैनिक शक्ति भी बेजोड़ है. अमेरिका के पास 11 विमानवाहक पोत हैं. ये तैरते हुए सैन्य अड्डों के रूप में काम करते हैं और दुनिया भर में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने में सक्षम हैं.

वहीं अगर ईरान की वायुसेना की बात करें तो वह काफी पुरानी हो चुकी है. ईरान के पास लगभग 500 एयरक्राफ्ट हैं. हालांकि ईरान अपनी नौसैनिक रणनीतियों से इसकी भरपाई कर लेता है. इसके बेड़े में तेज हमला करने वाली नावें शामिल हैं. इन्हें झुंड बनाकर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है. 

मिसाइल और ड्रोन ताकत

ईरान जिस क्षेत्र में सबसे अलग नजर आता है वह है मिसाइल और ड्रोन तकनीक. मिडिल ईस्ट में उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलों का सबसे बड़ा जखीरा मौजूद है. इनकी मारक क्षमता 2000 किलोमीटर तक है. इसके अलावा उसकी ड्रोन शक्ति आधुनिक युद्ध में काफी असरदार साबित हुई है. इन ड्रोन को सस्ते होने के बावजूद रोकना काफी मुश्किल होता है.

थल सेना और युद्ध की रणनीति 

जमीन पर संयुक्त राज्य अमेरिका एडवांस्ड टैंक, सैटलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और काफी फुर्तीली टुकड़ियों का इस्तेमाल करता है. उसकी युद्ध रणनीति सटीकता, रफ्तार और तकनीकी वर्चस्व पर आधारित है. वहीं दूसरी तरफ ईरान का नजरिया कुछ अलग है. उसका पहाड़ी इलाका स्वाभाविक रूप से उसकी रक्षा में काफी मदद करता है. सीधे आमने-सामने की लड़ाई के बजाय ईरान दुश्मन के अभियानों को पेचीदा बनाने के लिए गोरिल्ला युद्ध की रणनीति पर निर्भर रहता है. अमेरिका के पास 13 लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं और ईरान के पास लगभग 6 लाख सक्रिय सैनिक हैं.

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