अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स (FT) को दिए इंटरव्यू में चीन पर सीधा दबाव डाला है. उन्होंने कहा कि बीजिंग को अमेरिका के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खुला रखने में मदद करनी चाहिए. ट्रंप ने बताया कि चीन को अपना 90% तेल इसी महत्वपूर्ण जलमार्ग से मिलता है, इसलिए ये उनके लिए भी बहुत जरूरी है.
ट्रंप ने चीन पर मदद का दबाव डालते हुए क्या कहा?
ट्रंप ने FT से कहा, ‘मुझे लगता है चीन को भी मदद करनी चाहिए क्योंकि चीन को स्ट्रेट्स से 90% तेल मिलता है. जो देश इस रूट से फायदा उठाते हैं, उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां कुछ गलत न हो.’ ट्रंप ने ये भी कहा कि अगर चीन मदद नहीं करता तो वो चाइनीज प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ प्लान्ड समिट को टाल सकते हैं. ये समिट इस महीने के आखिर में होना है.
ट्रंप ने स्पेसिफिक मदद के बारे में बताया कि माइंसवीपर्स चाहिए और ऐसे लोग जो ईरानी शोर पर कुछ बैड एक्टर्स को नेस्तनाबूद करें. ट्रंप ने ये भी जोड़ा कि अमेरिका ईरान को बहुत जोर से मार रहा है, उनके पास अब सिर्फ थोड़ी सी मुश्किल का सामना करने की ताकत बची है.
ये बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को लगभग बंद कर रखा है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. तेल की कीमतें पहले ही 102 डॉलर से लेकर 106 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुकी हैं. अगर सिचुएशन नहीं सुधरी तो 200 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की आशंका है.
अमेरिका ने ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट हब पर किया हमला
अमेरिका ने ईरान के 90% तेल एक्सपोर्ट हब खार्ग द्वीप पर बड़े हमले किए हैं, लेकिन ईरान अभी भी रिटेलिएट कर रहा है. जैसे UAE के अल-धफ्रा बेस पर हाइपरसोनिक मिसाइल अटैक. ट्रंप पहले भी कई देशों, जैसे UK, फ्रांस, जापान और साउथ कोरिया से वॉरशिप्स भेजने की अपील कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर देशों ने मदद से इनकार किया है. ऑस्ट्रेलिया ने साफ मना कर दिया, UK ने भी सीमित मदद की बात की.
ट्रंप ने NATO को दी खुली चेतावनी
ट्रंप ने NATO को भी तगड़ा वार्निंग दी. FT इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर NATO के सहयोगी देश ईरान के मामले में और खासकर हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने में अमेरिका की मदद नहीं करते तो NATO का ‘बहुत बुरा भविष्य’ होगा. ट्रंप ने कहा, ‘अगर कोई रिस्पॉन्स नहीं आया या नेगेटिव रिस्पॉन्स आया तो NATO के फ्यूचर के लिए बहुत बुरा होगा.’ उन्होंने यूक्रेन में NATO की मदद का हवाला दिया कि अमेरिका ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ सपोर्ट किया, अब मदद की बारी उनकी है.
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को तेल की बहुत कम जरूरत है (सिर्फ 1%), लेकिन चीन, जापान, साउथ कोरिया जैसे देशों को ज्यादा निर्भरता है. इस कारण ये ‘छोटा काम’ है, सिर्फ स्ट्रेट को ओपन रखना. हालांकि, ईरान की मिलिट्री को कमजोर करने के बाद भी कोई बड़ा रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा.
