अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी और वर्तमान में एक्सपेडिएंशी काउंसिल के सदस्य मेजर जनरल मोहसिन रेजाई ने युद्धविराम की अंतरराष्ट्रीय मांगों को सख्ती से खारिज कर दिया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेहरान इस वक्त सीजफायर करने के मूड में नहीं है और जंग जीते बिना कोई सीजफायर नहीं होगा.
US से जीतने की क्या रेजाई की रणनीति?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, रेजाई ने कहा कि ईरान तब तक मौजूदा सैन्य टकराव को खत्म करने का अपना इरादा नहीं रखता है, जब तक इसका कोई निर्णायक नतीजा हासिल नहीं हो जाता हो. रेजाई ने इस बयान के जरिए ईरान के रुख को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बना दिया है. इसे तेहरान की रणनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर भी देखा जा रहा है. अब ईरान एक लंबे और थकाऊ युद्ध (War of Attrition) की रणनीति अपनाने की ओर बढ़ रहा है. इस रणनीति का उद्देश्य पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य और आर्थिक मौजूदगी की सहनशीलता को परखना है.
अमेरिका को किन-किन मोर्चों पर तोड़ना चाहता है ईरान?
रेजाई के बयान के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबे समय तक खींचता है, तो आखिर में यह अमेरिका के लिए अस्थिर और महंगा साबित होगा. तेहरान की रणनीति तीन प्रमुख मोर्चों पर अमेरिका पर दबाव बढ़ाने की है, जिसमें आर्थिक स्थिरता, सैन्य संसाधन और मानवीय क्षति करना शामिल है.
खुफिया सूत्रों के हवाले से सीएनएन ने रिपोर्ट किया कि इस संदेश को ईरान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी व्यापक रूप से फैलाया जा रहा है, ताकि यह धारणा बनाई जा सके कि आखिर में कभी न हारने वाले अमेरिका को फारस की खाड़ी से पीछे हटना पड़ेगा. यह माना जा रहा है कि एक मजबूत और अडिग तस्वीर पेश करके तेहरान क्षेत्रीय देशों और अमेरिकी जनता दोनों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि खाड़ी क्षेत्र में बने रहने की कीमत अमेरिका के लिए रणनीतिक फायदे से कहीं ज्यादा भारी पड़ सकती है.
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