AIMIM के सदर और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन औवैसी ने एक बार फिर बेबाकी से वो बातें कही हैं, जो बहुत से लोग सोचते हैं मगर कहने से डरते हैं. उन्होंने एक के बाद एक वाकियात गिनाए और सवाल किया कि क्या इस मुल्क में मुसलमान होना अब जुर्म बन गया है?
औवैसी ने दिल्ली के उस झगड़े का जिक्र किया जो शुरू हुआ गंदे पानी से और खत्म हुआ एक जवान की मौत, एक बुज़ुर्ग, तीन औरतों और दो बच्चों की गिरफ्तारी और बुलडोजर से एक पूरे घर की तबाही पर. उन्होंने साफ कहा, “ये सजा नहीं थी, ये एक संदेश था और वो संदेश किसके लिए था, ये किसी को समझाने की जरूरत नहीं.”
AIMIM सांसद ने कई लोगों का दिया उदाहरण
मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स का हवाला देते हुए औवैसी ने कहा कि खैरुल इस्लाम और अशरफुल इस्लाम को महज बंगाली और मिया कहकर चुनाव के दौरान कत्ल कर दिया गया. जामा मस्जिद तुरा की बेहुर्मती की गई. कातिलों ने खुलेआम ऐलान किया कि यहां अल्लाह-हू-अकबर नहीं चलेगा. औवैसी ने पूछा क्या मस्जिद भी बाहर से आई थी?
उन्होंने बिहार की रोशन खातून, भिवाड़ी के आमिर खान, दरभंगा के 65 साल के अब्दुल सलाम एक-एक नाम लेकर औवैसी ने याद दिलाया कि ये आंकड़े नहीं, इंसान थे. अब्दुल सलाम तो सिर्फ नफरत के नारे लगाते नौजवानों को समझाने गए थे, आयरन रॉड से उनकी जान ले ली गई.
डीएसपी के वीडियो पर क्या बोले ओवैसी?
एक डीएसपी के वीडियो पर औवैसी भड़क उठे, जिसमें अधिकारी मुसलमानों को धमकाते हुए कह रहा था कि ईरान पर एतेराज करोगे तो जेल भेज देंगे, तकलीफ हो तो ईरान चले जाओ. औवैसी ने सीधे कहा, “ये मुल्क आपके बाप का नहीं है. आर्टिकल 19 हर हिंदुस्तानी का हक है.”
सबसे दर्दनाक सवाल वो था, जो उन्होंने एक 12 साल के बच्चे के वीडियो को देखकर पूछा कि इस उम्र में इतनी नफरत कहां से आई? कौन भर रहा है ये जहर नन्हे दिलों में? औवैसी का जवाब साफ था जब सियासत नफरत को हथियार बना ले, तो उसकी आग सिर्फ एक कौम को नहीं, पूरे हिंदुस्तान की रूह को जला देती है.
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