इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब 11वें दिन में पहुंच गया है. ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भी लड़ाई रुकी नहीं है. बल्कि एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खामेनेई की मौत के ठीक बाद ईरान ने एक खास सिग्नल भेजकर अपने स्लीपर सेल्स को अलर्ट कर दिया था.
एन्क्रिप्टेड मैसेज भेजने वाले का पता क्यों नहीं?
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरानी मूल का एक एन्क्रिप्टेड मैसेज पकड़ा है. ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिग्नल 28 फरवरी 2026 को खामेनेई की मौत के तुरंत बाद आया. वो मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में हुई थी. फेडरल अलर्ट में कहा गया है कि ‘प्रेलिमिनरी सिग्नल एनालिसिस’ से लगता है ये मैसेज ईरान से ही आया.
ये सिग्नल कई देशों में दोबारा ब्रॉडकास्ट किया गया, जो आम बात नहीं है. मैसेज पूरी तरह एन्क्रिप्टेड था और सिर्फ जिनके पास डिक्रिप्शन की चाबी है, वही उसे पढ़ सकते हैं. ऐसे मैसेज अक्सर खुफिया एजेंसियां या मिलिटेंट ग्रुप्स इस्तेमाल करते हैं ताकि इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क का कोई निशान न रहे.
क्या किसी खास जगह पर मंडरा रहा खतरा?
अलर्ट में साफ लिखा है- ‘ये संभव है कि ये ट्रांसमिशन बाहर मौजूद स्लीपर एसेट्स को सक्रिय करने या उन्हें निर्देश देने के लिए भेजा गया हो.’ हालांकि, अलर्ट में ये भी कहा गया कि ‘सटीक मैसेज क्या था, ये अभी पता नहीं चल पाया. लेकिन अचानक एक नई स्टेशन का इंटरनेशनल रीब्रॉडकास्ट शुरू होना चिंता की बात है.’ फिर भी, किसी खास जगह पर तुरंत खतरा नहीं बताया गया.
इजरायल ने ईरान का तेल डिपो उड़ाया
युद्ध की बात करें तो इजरायल ने सोमवार को ईरान के सेंट्रल इलाके पर नए हमले किए. साथ ही बेरूत में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को भी निशाना बनाया. इससे एक दिन पहले इजरायल ने तेहरान के ऑयल डिपो पर हमला किया था. ईरान भी जवाब दे रहा है- मिसाइल और ड्रोन से इजरायल पर और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बेस वाले देशों पर हमले हो रहे हैं.
रविवार को सऊदी अरब में एक प्रोजेक्टाइल गिरने से दो विदेशी नागरिक मारे गए, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है. ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत ने बताया कि उनके देश में आम लोगों की मौत का आंकड़ा अब 1,332 हो गया है. हजारों घायल भी हैं. अमेरिका ने भी कन्फर्म किया कि संघर्ष में घायल एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई, अब ये संख्या 8 पहुंच गई है.
लड़ाई लगातार बढ़ रही है और खामेनेई की मौत के बाद लीडरशिप बदलने के बावजूद ईरान की तरफ से कोई रुकावट नहीं आई. पूरी दुनिया इस स्थिति पर नजर रखे हुए है.
