स्टॉक, शेयर मार्केट में निवेश करने वाले कर्मचारियों की बढ़ेगी मुश्किल? योगी सरकार ने लिया ये फैसला


उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 और नियम-24 में संशोधन करने का निर्णय लिया है. प्रस्तावित संशोधन के तहत नियम-21 में प्रावधान किया जा रहा है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने 6 माह के मूल वेतन से अधिक की धनराशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो इसकी सूचना उसे समुचित प्राधिकारी को देनी होगी.

इसी प्रकार नियम-24 में भी बदलाव प्रस्तावित है. इसके तहत पहले 1 माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदने की सूचना देनी होती थी, जिसे संशोधित कर 2 माह से अधिक मूल्य की किसी चल संपत्ति के क्रय की सूचना समुचित प्राधिकारी को देना अनिवार्य किया जा रहा है. इसके साथ ही अचल संपत्ति की घोषणा से संबंधित प्रावधान में भी बदलाव किया जा रहा है. पहले प्रत्येक 5 वर्ष में अचल संपत्ति की घोषणा करनी होती थी, जबकि संशोधन के बाद अब प्रत्येक 1 वर्ष की अवधि पूरी होने पर अचल संपत्ति की घोषणा करना अनिवार्य किया जाएगा.

मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण, नये शहर प्रोत्साहन योजना लागू

इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास के साथ नगरीय जनसंख्या को आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है. इस योजना के अंतर्गत नए शहरों के समग्र और समुचित विकास के लिए शासनादेश दिनांक 6 अप्रैल 2023 को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे.

योजना के तहत भूमि अर्जन में होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिसे अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाएगा. नए शहरों के समग्र और समुचित विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3000 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया गया है.

वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित 3000 करोड़ रुपये की धनराशि में से संबंधित अभिकरणों-बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, टांडा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ-के लिए सीड कैपिटल के रूप में कुल 425 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.



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