ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में दुनिया का सबसे अमीर देश अमेरिका अपने खजाने से हर रोज करीब 891 मिलियन डॉलर (भारतीय रुपये में करीब 8,223 करोड़) खर्च कर रहा है. युद्ध के पहले ही सप्ताह में कुल खर्च करीब 6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है और इस संबंध में एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आंकड़ा आगे चलकर दसियों अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि युद्ध के पहले हफ्ते का खर्च करीब 6 अरब डॉलर रहा. इसमें यह भी कहा गया कि रिपब्लिकन नेताओं को उम्मीद है कि प्रशासन को और ज्यादा फंडिंग के लिए कांग्रेस से और पैसा मांगना पड़ सकता है.
ट्रंप प्रशासन खर्च के लिए और पैसों की हो सकती है जरूरत
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की ओर से जारी जानकारी के आधार पर प्रतिदिन औसत खर्च करीब 891.4 मिलियन डॉलर है. इसमें कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी कांग्रेस से और ज्यादा बजट की मांग करनी पड़ सकती है, जैसा कि 2000 के दशक में इराक और अफगानिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन ने किया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस तरह की फंडिंग युद्ध के विरोध का एक बड़ा मुद्दा बन सकती है.
एक हफ्ते के दौरान युद्ध में हुआ भारी खर्च
अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में सिर्फ एक हफ्ते में ही इतना पैसा खर्च कर दिया है, जो दुनिया के कई छोटे देशों की पूरी जीडीपी से भी ज्यादा है. वहीं, भारत के साथ तुलना के तौर पर देखें, तो 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन का खर्च भारत के पूरे सालाना अंतरिक्ष बजट से भी ज्यादा है.
संघर्ष के पहले हफ्ते के 6 अरब डॉलर के कुल खर्च में से करीब 4 अरब डॉलर हथियारों पर खर्च हुए. इसमें मुख्य रूप से ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किए गए इंटरसेप्टर शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यह खर्च पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर दो घंटे तक किए गए हमले, ऑपरेशन मिडनाइट हैमर, से भी काफी ज्यादा है.
किन-किन चीजों पर रोजाना हो रहा खर्च?
CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ जारी युद्ध में रोजाना होने वाले प्रमुख खर्च इस प्रकार हैं:
- हवाई अभियानः करीब 30 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
- नौसैनिक अभियानः करीब 15 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
- जमीनी अभियानः करीब 1.6 मिलियन डॉलर प्रतिदिन
इस बीच इलाके में अमेरिकी सैन्य बलों की संख्या 50,000 से अधिक हो गई है. इसमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स, करीब एक दर्जन युद्धपोत और कई दर्जन बमवर्षक और लड़ाकू विमान शामिल हैं. CSIS का अनुमान है कि अगर अमेरिका सस्ते हथियारों का इस्तेमाल शुरू करता है और ईरान की ड्रोन और मिसाइल हमले कम होते हैं, तो भविष्य में युद्ध का रोजाना खर्च कुछ कम हो सकता है.
