उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव और वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं. अमेठी विधानसभा की राजनीति में हमेशा से राजघराने की अहम भूमिका रही है. ऐसे में एक बार फिर अमेठी का राजघराना चर्चा के केंद्र में है, जहां से दो संभावित प्रत्याशी मैदान में उतरने की तैयारी करते दिखाई दे रहे हैं.
अमेठी विधानसभा की राजनीति में राजपरिवार का लंबा इतिहास रहा है. वर्ष 1969 में राजा रणंजय सिंह जनसंघ के टिकट पर विधायक चुने गए थे. इसके बाद 1980 और 1985 में डॉ संजय सिंह विधायक बने. वर्ष 2007 में डॉ अमीता सिंह अमेठी से विधायक चुनी गईं. वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में गरिमा सिंह विधायक निर्वाचित हुई थीं. हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से डॉ संजय सिंह ने चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
राजघराने से दो संभावित दावेदार
आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजघराने के भीतर ही दो अलग-अलग दावेदारी सामने आती दिखाई दे रही है. जिसमें एक अमेठी की बहू है तो दूसरी बेटी. एक ओर पूर्व विधायक गरिमा सिंह अपने पुत्र युवराज अनंत विक्रम सिंह की पत्नी शांभवी सिंह को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रही हैं. वहीं दूसरी ओर डॉ संजय सिंह और डॉ अमीता सिंह अपनी पुत्री एडवोकेट आकांक्षा सिंह को अमेठी की राजनीति में सक्रिय करते नजर आ रहे हैं.
सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़ी सक्रियता.
अमेठी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में युवराज अनंत विक्रम सिंह अपनी पत्नी शांभवी सिंह के साथ लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और लोगों से मेल-मिलाप कर रहे हैं. वहीं डॉ संजय सिंह और डॉ अमीता सिंह भी अपनी पुत्री आकांक्षा सिंह के साथ सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते नजर आ रहे हैं. इससे अमेठी की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
एक ही पार्टी से टिकट की दावेदारी
राजघराने के दोनों संभावित प्रत्याशी भारतीय जनता पार्टी से ही टिकट की दावेदारी करते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि अमेठी विधानसभा सीट से बीजेपी के भीतर ही एक दर्जन से अधिक नेता टिकट के दावेदार बताए जा रहे हैं. ऐसे में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को ही करना होगा कि वह किसे अपना प्रत्याशी घोषित करती है.
बीजेपी के प्रति निष्ठा दोहराई
इस संबंध में युवराज अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि उनका परिवार पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के साथ है और आगे भी रहेगा. उन्होंने कहा कि उनकी माता गरिमा सिंह भाजपा के टिकट पर अमेठी की विधायक रह चुकी हैं और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा हमेशा बनी रहेगी. उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अमेठी से शांभवी सिंह को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है. यदि किसी कारण से पार्टी में उनके नाम पर विचार नहीं होता है तो विकल्प के रूप में वह स्वयं भी चुनाव लड़ सकते हैं.
किसी अन्य पार्टी में जाने से किया इनकार
युवराज अनंत विक्रम सिंह ने स्पष्ट कहा कि टिकट मिले या न मिले, उनका परिवार भाजपा के साथ ही रहेगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में भी उनके परिवार को टिकट नहीं मिला था, फिर भी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी और भविष्य में भी पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे.
पंचायत चुनाव को लेकर अनंत विक्रम सिंह का गए बड़ी बात
इस बातचीत के दौरान युवराज अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि उन्हें जानकारी मिल रही है कि डॉ अमीता सिंह अपनी पुत्री आकांक्षा सिंह को आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के रूप में चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो जिस वार्ड से आकांक्षा सिंह चुनाव लड़ेंगी, उस वार्ड से उनके परिवार का भी एक सदस्य चुनाव मैदान में उतरेगा. नाम के रूप में महारानी गरिमा सिंह अथवा मैं स्वयं अनंत विक्रम सिंह कोई भी हो सकता है.
शिक्षा दीक्षा और बैकग्राउंड
युवराज अनंत विक्रम सिंह ने बताया कि शांभवी सिंह ही अमेठी की जनता और राज परिवार के बीच सेतु का काम करेगी. वह पढ़ी-लिखी होने के साथ-साथ तेजतर्रा महिलाएं जो निश्चित रूप से घर के अंदर से लेकर बाहर तक सभी मानदंडों पर खरी उतरेंगी. युवराज ने बताया कि वह जिस परिवार से यहां आई हैं वह परिवार भी राजनीतिक रहा है और वर्तमान में है भी. वह पोस्ट ग्रेजुएट हैं , पढ़ाई लिखाई का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने स्नातक में एलएडी कॉलेज नागपुर में टॉप थ्री में अपना स्थान सुरक्षित किया था.
इसके उपरांत उन्होंने पुणे से पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल किया. अमेठी क्षेत्र की माताओं बहनों ने मेरी माता जी को बढ़-चढ़कर वोट किया पसंद किया और उन्हें अमेठी से विधायक चुना. इसलिए हम लोग चाहते हैं की अमेठी की नारियों को बढ़ चढ़कर सम्मान मिले. भारतीय जनता पार्टी भी चाहती है अधिक से अधिक महिलाओं को स्थान मिले. इसीलिए हम लोग भी घर की महिला को आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं. जो महिलाएं क्षेत्र में सक्रिय है और जनता जिनको चाह रही है उनको भी आगे बढ़ाना हम सबका कर्तव्य है. यदि भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपना आशीर्वाद देगा तो अमेठी विधानसभा से शंभवी सिंह पूरी दमदारी से चुनाव लड़ेंगी और जीतेंगी भी.
इंग्लैंड से बैरिस्टर बनीं अमेठी रियासत की राजकुमारी आकांक्षा सिंह
पूर्व केंद्रीय मंत्री व अमेठी रियासत के मुखिया डॉ संजय सिंह तथा उत्तर प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी डॉ अमीता सिंह की पुत्री राजकुमारी आकांक्षा सिंह ने इंग्लैंड से बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त कर अमेठी का नाम रोशन किया है.
नई दिल्ली से की प्रारंभिक शिक्षा
आकांक्षा सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली के ब्रिटिश स्कूल से पूरी की, जहां से उन्होंने आईजीसीएसई ओ-लेवल और जीसीई ए-लेवल की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से विधि (ला) में स्नातक की डिग्री प्राप्त किया.
लंदन से कानून में मास्टर डिग्री
उच्च शिक्षा के लिए आकांक्षा सिंह लंदन चली गईं, जहां सिटी यूनिवर्सिटी लंदन से क्रिमिनल लिटिगेशन में विशेषज्ञता के साथ कानून में मास्टर डिग्री हासिल किया है. अपने माता-पिता की तरह ही शिक्षा को आत्मविकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए वह आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कर रही हैं प्रैक्टिस
वर्तमान में राजकुमारी आकांक्षा सिंह दिल्ली उच्च न्यायालय तथा भारत का सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने देश के कई नामचीन अधिवक्ताओं के साथ कार्य किया है, जिनमें अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी, सिद्धार्थ लूथरा तथा स्वर्गीय राम जेठमलानी जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं.
कई बड़े मामलों में की प्रभावी पैरवी
अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करते हुए आकांक्षा सिंह ने क्रिमिनल, वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स और घरेलू हिंसा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी कर पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
अमेठी की जनता से है विशेष लगाव
बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ राजकुमारी आकांक्षा सिंह अमेठी और सुल्तानपुर आती-जाती रही हैं. वर्तमान समय में वह अपने माता-पिता की देखभाल और सहयोग के लिए अमेठी में मौजूद हैं और क्षेत्र के लोगों से लगातार मुलाकात कर रही हैं.
जनता की सेवा परिवार का मुख्य ध्येय
पूर्व मंत्री डॉ अमीता सिंह के अनुसार उनके लिए अमेठी की जनता देवतुल्य है और यही संस्कार उन्होंने अपनी बेटी को भी दिए हैं. डॉ संजय सिंह और डॉ अमीता सिंह हमेशा की तरह क्षेत्र के लोगों से मिलकर उनके सुख-दुख का हाल ले रहे हैं और इस दौरान राजकुमारी आकांक्षा सिंह भी उनका सहयोग करती दिखाई दे रही हैं. अमेठी विधानसभा क्षेत्र के लोगों से उन्हें अपार स्नेह प्राप्त हो रहा है.
आने वाला 2027 का चुनाव अमेठी की जनता के लिए एक बार फिर से दुविधा भरा चुनाव होने वाला है. क्योंकि राजघराने से बेटी और बहू दोनों चुनाव मैदान में एक साथ उतर सकती हैं. ऐसे में अमेठी की जनता को यह निर्णय लेने में अत्यंत कठिनाई होगी कि किसे सिर का ताज बनाएं और किसे बाहर का रास्ता दिखाएं. हालांकि यह कोई नई बात नहीं है वर्ष 2017 के चुनाव में भी अमेठी विधानसभा से राजघराने की दो बहुएं आमने-सामने थी.
जिसमें डॉ संजय सिंह की पहली पत्नी महारानी गरिमा सिंह और दूसरी पत्नी डॉक्टर अमीता सिंह दोनों चुनाव मैदान में प्रत्याशी के रूप में थी. एक तरफ जहां महारानी गरिमा सिंह भारतीय जनता पार्टी से के टिकट पर चुनाव लड़ रही थी वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर अमीता सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही थी. ऐसे में अमेठी की जनता ने डॉक्टर संजय सिंह की पहली पत्नी महारानी गरिमा सिंह को अपना समर्थन देते हुए विधायक चुना था. ऐसा प्रतीत होता है कि 2017 वाला विधानसभा चुनाव 10 साल बाद 2027 में एक बार फिर से देखने को मिलेगा जो काफी रोमांचक होगा.
