उच्चस्तरीय शिक्षा, नवाचार और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं से बेटियां बन रहीं आत्मनिर्भर



उत्तर प्रदेश में बेटियों को सुरक्षित माहौल देने के बाद योगी सरकार का लक्ष्य उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है, ताकि उनके सपनों को पंख मिल सकें. इसके लिए सरकार शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में लगातार नए अवसर सृजित कर रही है. उच्चस्तरीय शिक्षा, नवाचार और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश की बेटियों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिल रहा है. प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि बेटियां केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक कौशल के साथ रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें.

इसी दिशा में राज्य सरकार द्वारा संचालित उत्तर प्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन के माध्यम से बड़ी संख्या में युवतियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मिशन के तहत आईटी, हेल्थकेयर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है. सरकार ने कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर विशेष जोर दिया है.

प्रशिक्षण केंद्रों में युवतियों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल स्किल और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण के बाद उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. इसके साथ ही बेटियों को स्वरोजगार और स्टार्टअप के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. तकनीकी प्रशिक्षण के साथ अब युवतियों को सॉफ्ट स्किल्स, डिजिटल लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक क्षमताओं में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें.

इसी दिशा में कौशल विकास मिशन ने छह प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ समझौता कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और आधुनिक बनाया है. इन संस्थाओं के सहयोग से युवतियों को मंच कौशल, संवाद क्षमता, व्यक्तित्व विकास और डिजिटल दक्षता का प्रशिक्षण दिया जाएगा. परफॉर्मिंग आर्ट्स और सॉफ्ट स्किल्स के प्रशिक्षण से युवतियों में संवाद कौशल, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होगा. भारतेंदु नाट्य अकादमी के सहयोग से प्रशिक्षणार्थियों को मंच कौशल और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे कला आधारित रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.

सरकार कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की मांग के अनुरूप बनाने पर जोर दे रही है. इसी उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी और कौशल विकास मिशन के बीच ‘कौशल कनेक्ट सेल’ का गठन किया गया है, जिससे निवेश करने वाले उद्योगों को प्रशिक्षित वर्कफोर्स उपलब्ध कराई जा सकेगी. इससे युवतियों के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे. कौशल प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों की परफॉर्मेंस-बेस्ड ग्रेडिंग प्रणाली लागू की गई है. इस व्यवस्था के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को अधिक अवसर दिए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और युवाओं के साथ ही युवतियों को बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे.

युवाओं को योजनाओं और रोजगार अवसरों से जोड़ने के लिए मिशन मुख्यालय में ‘कौशल कॉल सेंटर’ भी शुरू किया गया है. इसके माध्यम से प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार से जुड़ी जानकारी सीधे युवाओं तक पहुंचाई जाएगी, ताकि कोई भी बेटी केवल जानकारी के अभाव में किसी अवसर से वंचित न रह जाए. तकनीकी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.

प्रदेश के विभिन्न तकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों में छात्राएं इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य तकनीकी विषयों में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. वर्तमान में प्रदेश में लगभग 35 सेक्टर्स और 1300 से अधिक जॉब रोल्स में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भी कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं.

योगी सरकार की इन पहलों से उत्तर प्रदेश की बेटियां शिक्षा, कौशल और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

(लेखिका दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. सामाजिक बदलावों में गहरी अभिरुचि रखती हैं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर लेखन करती हैं.)



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